स्वप्निल कुसाले के पिता सुरेश कुसाले की खुशी की कोई सीमा नहीं है। वह यही कहते हैं, उनका संघर्ष सफल हो गया। स्वप्निल के पिता को वह हर दिन याद आ रहा है, जब उन्होंने बेटे की शूटिंग के लिए बैंक से लोन लिया और दोस्तों से कर्ज उठाया, लेकिन उन्होंने स्वप्निल की शूटिंग में कोई बाधा नहीं आने दी। एक दिन वह भी था जब 2012 में स्वप्निल को अपना पहला अंतरराष्ट्रीय कंपटीशन खेलने के लिए जर्मनी जाना था, लेकिन उनके पास बेटे को भेजने के लिए पैसा नहीं था। उन्होंने हार नहीं मानी और बैंक से डेढ़ लाख रुपये का लोन लेकर स्वप्निल को जर्मनी में कंपटीशन खेलने के लिए भेजा।
स्वप्निल कुसाले
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2015 तक करना पड़ा संघर्ष
सुरेश बताते हैं कि स्वप्निल के 2015 में रेलवे ज्वाइन करने से पहले तक उन्हें काफी दिक्कत आई। 2014 एशियाई खेलों के दौरान एक दिन स्वप्निल का फोन आया कि उनके पास तैयारियों के लिए गोलियां नहीं हैं। उनकी जेब में सिर्फ सौ रुपये हैं। सुरेश बताते हैं कि उस दौरान उनके पास भी इतना पैसा नहीं था कि वे स्वप्निल की गोलियां खरीद पाते, लेकिन उन्होंने दोस्तों से 30 हजार रुपये उधार लेकर स्वप्निल को गोलियां दिलवाईं।
स्वप्निल कुसाले
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साइकिलिंग और शूटिंग में एक खेल चुनना था
सुरेश बताते हैं कि स्वप्निल जब कक्षा आठ में थे तब राज्य सरकार की स्कीम क्रीड़ा प्रबोधिनी के लिए उनका चयन हुआ। पूना में उनके समक्ष साइकिलिंग और शूटिंग को अपनाने का विकल्प रखा गया। कोच ने स्वप्निल को राइफल देकर 10 निशाने लगवाए, जिसमें नौ निशाने लक्ष्य पर थे। इसके बाद उन्होंने शूटिंग को अपना लिया।