पाकिस्तान के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता भाला फेंक खिलाड़ी अरशद नदीम इस महीने होने वाली लुसाने डायमंड लीग में हिस्सा नहीं लेंगे। उन्होंने आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और इस साल जापान में होने वाले एशियन गेम्स की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है।
दक्षिण अफ्रीका में करेंगे विशेष ट्रेनिंग
अरशद के लंबे समय से कोच सलमान बट ने बताया कि 28 वर्षीय खिलाड़ी फिलहाल लाहौर में अभ्यास कर रहे हैं। वह जल्द ही दक्षिण अफ्रीका के पोचेफ्सट्रूम जाएंगे, जहां वह अपने कोच टेरसियस लिबेनबर्ग और स्थानीय प्रशिक्षकों की देखरेख में कुछ सप्ताह तक ट्रेनिंग करेंगे। सलमान बट ने कहा, 'उन्होंने इस महीने डायमंड लीग में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है, क्योंकि वह एशियन गेम्स के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहते हैं।'
कॉमनवेल्थ गेम्स में रहा निराशाजनक प्रदर्शन
अरशद को हाल ही में ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल में शीर्ष आठ में जगह नहीं मिल सकी थी। इस स्पर्धा में श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने 89.75 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि भारत के नीरज चोपड़ा और यश वीर सिंह ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक अपने नाम किए। यह पहली बार था जब पुरुष भाला फेंक स्पर्धा के पोडियम पर दो भारतीय खिलाड़ियों ने जगह बनाई।
डायमंड लीग में नहीं दिखेंगे अरशद
अरशद को 21 अगस्त को होने वाली लुसाने डायमंड लीग में हिस्सा लेना था, जहां नीरज चोपड़ा के अलावा जूलियन वेबर और एंडरसन पीटर्स जैसे दिग्गज खिलाड़ी भी मैदान में उतरने वाले हैं। हालांकि, अब वह इस प्रतियोगिता से बाहर हो गए हैं और सीधे दक्षिण अफ्रीका में ट्रेनिंग कैंप के लिए रवाना होंगे। पोचेफ्सट्रूम वही स्थान है, जहां अरशद ने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2024 ओलंपिक से पहले भी अभ्यास किया था। दोनों प्रतियोगिताओं में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था।
आगे का कार्यक्रम
दक्षिण अफ्रीका में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद अरशद छह से 14 सितंबर तक बुडापेस्ट में होने वाली वर्ल्ड एथलेटिक्स अल्टीमेट चैंपियनशिप में हिस्सा ले सकते हैं। इसके बाद उनका मुख्य लक्ष्य एशियन गेम्स होगा। सलमान बट ने बताया कि अर्शद फिलहाल दक्षिण अफ्रीका जाने के लिए वीजा मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इस साल दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाने और कॉमनवेल्थ गेम्स में नौवें स्थान पर रहने के बाद उन्हें आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा है।