पूजा ने इससे पहले बेलारुस की के. यानुश्चेविच को आसानी से 12-2 से हराकर अंतिम आठ में प्रवेश किया था। पूजा ने आक्रामक अंदाज में मुकाबले की शुरुआत की और बेलारुस की पहलवान उनका सामना नहीं कर पाई। उन्होंने आसानी से आत्मसमर्पण कर दिया।
इससे पहले पूजा ने क्वार्टर फाइनल में शीर्ष वरीयता प्राप्त जापान की युजुका इनागाकी को कड़े संघर्ष के बाद 11-8 से हराकर उलटफेर किया था। पूजा इस मैच में वर्ल्ड नंबर पांच युजुका के खिलाफ 0-5 से पिछड़ रही थी, लेकिन उन्होंने इसके बाद शानदार तरीके से वापसी कर जीत दर्ज करते हुए सेमीफाइनल में प्रवेश किया था।
सेमीफाइनल में उन्हें 2017 की यूरोपियन चैंपियन लियुबोव ओवचारोवा ने एकतरफा सेमीफाइनल में मात्र 2 मिनट 37 सेकंड में तकनीकी श्रेष्ठता (10-0) से हरा दिया। पूजा इस मुकाबले में कोई चुनौती पेश नहीं कर पाई और आसानी से मैच गंवा बैठी।
अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित होतीं पूजा
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हिसार के बुगाना गांव निवासी पूजा ढांडा को खेल दिवस के मौके पर इसी साल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स की रजत पदक पूजा के नाम पिछले नौ वर्षो में दर्जन भर से अधिक राष्ट्रीय व अंतर राष्ट्रीय पदक हैं।
पूजा ने हाल में जुलाई में मैड्रिड (स्पेन) में आयोजित स्पेन ग्रैंड-प्रिक्स रेसलिंग चैंपियनशिप में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 57 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक प्राप्त किया। पूजा ढांडा ने अपने खेल करियर की शुरुआत वर्ष 2009 में जूडो खिलाड़ी के रूप में की थी।
साल 2015 में खेल के दौरान पूजा चोटिल होने के कारण दो वर्ष तक खेलों से दूर रही हैं, लेकिन पूजा ने जनवरी 2017 में शानदार वापसी की। पूजा ने वर्ष 2018 में भी कॉमनवेल्थ गेम्स व सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में देश का नाम रोशन किया।
16 साल की होने तक पूजा जूडो या कुश्ती के बीच चुनाव में उलझी रहीं। एशियाई चैंपियनशिप विजेता कृपा शंकर बिश्नोई की सिफारिश पर उन्होंने कुश्ती का दामन थामा। उन्हें सबसे बड़ा समर्थक पिता अजमेर सिंह में मिला, जो हरियाणा पशुपालन केंद्र में काम करते हैं।