तेलंगाना की निकहत भारत की ऐसी पांचवीं महिला मुक्केबाज हैं जिन्होंने विश्व चैंपियनशिप में सोने का तमगा अपने नाम किया है। निकहत से पहले दिग्गज एम सी मैरीकॉम ने 2002, 2005, 2006, 2008, 2010 और 2018 में खिताब जीते थे।
भारतीय मुक्केबाज निकहत जरीन (52 भारवर्ग) ने गुरुवार को विश्व चैंपियन बन गईं। उन्होंने 52 भारवर्ग के फाइनल में थाईलैंड की जितपोंग जुटामेंस को एकतरफा 5-0 से हरा दिया। तेलंगाना की मुक्केबाज भारत की ऐसी पांचवीं महिला मुक्केबाज हैं जिन्होंने विश्व चैंपियनशिप में सोने का तमगा अपने नाम किया है। निकहत की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें बधाई दी।
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प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा, ''निकहत जरीन को महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में शानदार स्वर्ण पदक जीतने के लिए बधाई। मैं मनीषा मौन और परवीन हुड्डा को भी इसी प्रतियोगिता में कांस्य पदक के लिए बधाई देता हूं।''
अमित शाह ने ट्वीट किया, ''महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने पर निकहत जरीन को बधाई। भारत को आपकी उपलब्धि पर गर्व है। आपके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं।''
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मैरी कॉम के क्लब में शामिल हुईं निकहत
निकहत से पहले दिग्गज एम सी मैरीकॉम ने 2002, 2005, 2006, 2008, 2010 और 2018 में खिताब जीते थे। इसके अलावा 2006 में सरिता देवी, जेनी आर एल और लेखा केसी ने अपने-अपने भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीता था।
भारत को चार साल बाद मिला स्वर्ण
जरीन के स्वर्ण पदक के अलावा मनीषा मौन (57 भारवर्ग) और पहली बार विश्व चैंपियनशिप में खेल रही प्रवीण हुड्डा (63 भारवर्ग) ने कांस्य पदक अपने नाम किया। इन दोनों को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा था। निकहत इस बार फाइनल में पहुंचने वालीं पहली भारतीय मुक्केबाज बनीं। सेमीफाइनल में जरीन ने ब्राजील की कैरोलिन डि अलमेडा को भी 5-0 से पराजित किया था। भारत की ओर से 12 सदस्यीय टीम ने हिस्सा लिया था। भारत ने चार वर्ष के बाद स्वर्ण पदक हासिल किया है। इससे पहले 2018 में एम सी मैरीकॉम ने जीता था।