इसमें कोई शक नहीं कि मेरी बहन ने मेरे धावक बनने के सफर में अहम भूमिका निभाई, वह मुझे दौड़ने की प्रेरणा देती रही, लेकिन हर इंसान अलग होता है और उसकी इच्छाएं भी अलग-अलग होती हैं। काश की मेरी बहन ये समझ पाती।
अब मैं क्या करूं अगर मुझे एक लड़की से प्यार है। सरस्वती (बड़ी बहन) अब तक मुझे समझ नहीं पाई है, उसके साथ रिश्तों में थोड़ी दरार आ गई है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि घर के छोटे-मोटे झगड़ों की तरह एक दिन ये दरार भी शायद भर जाए।
आपने सही कहा। दरअसल, मेरे खेल की जब बात आती है तो मेरा परिवार मेरी ढाल बनता है, मुझे समझता है, मेरी परेशानियों को दूर करने की कोशिश करता है, लेकिन, जब निजी जिंदगी में विश्वास और साथ की उम्मीद करती हूं तो वह कोना परिवार की ओर से खाली दिखाई देता है। खासतौर पर बड़ी बहन तो बिल्कुल नहीं समझतीं। मेरे समलैंगिक रिश्ते को आज भी मेरा परिवार, मेरी बहन कोई भी अपनाना नहीं चाहता। उस कारण से रिश्तों में खिंचाव जरूर है।
आईएएफ़ का एक नियम था जो अब संशोधित किया गया है। नियम के मुताबिक़, जिस महिला धावक में मेल सेक्स हार्मोन जैसे टेस्टोस्टेरॉन की मात्रा ज्यादा पाई जाती थी तो उसे हार्मोन ट्रीटमेंट के लिए कहा जाता था।
उनके मुताबिक टेस्टोस्टेरॉन की ज्यादा मात्रा से इस खेल में बेहतर धावक होने की क्षमता बढ़ जाती है। इस टेस्ट को फीमेल हाइपरएंड्रोजेनिज्म कहते हैं। पहले तो आपको बता दूं कि ये टेस्ट तभी होते हैं जब कोई आपकी शिकायत करे या फिर आपको जानबूझ कर खेलने से रोकने की कोशिश करे।
जब मेरे खून की जांच हुई तो मैं इस टेस्ट में फ़ेल हो गई और मुझ में मेल सेक्स हार्मोन की मात्रा ज्याद पाई गई। तो आईएएएफ ने मुझे ट्रीटमेंट कराने की सलाह दी और मैं 2014 के राष्ट्रमंडल खेल और एशियन गेम्स में नहीं खेल पाई।
इसके बाद मैंने अदालत में लड़ने का फैसला किया। स्वीट्जरलैंड के कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट्स में अपनी वकील की मदद से मैंने केस किया। मैंने 2015 में ये केस जीता और अब 100 मीटर रेस पर ये नियम लागू नहीं होता। वो इस बात को साबित नहीं कर पाए कि 100 मीटर रेस के लिए महिला धावक में मेल सेक्स हार्मोन की ज्यादा होने से खेल में फायदा मिलता है।
केस जीतने से पहले तक मैंने बहुत अपमान झेला। गांव में लोगों को लगने लगा था कि मैं लड़का हूं क्योंकि उन्हें ये सब बातें समझ नहीं आतीं। जब मैंने समलैंगिक रिश्ते में होने की बात बताई तब मुझे लगा कि लोग अब सोचेंगे कि 2014 में मेरे बारे में उनका अंदाजा सही था, जबकि ऐसा नहीं है, मैं लड़की हूं और एक लड़की को पसंद करती हूं।
निजी ज़िंदगी से आगे बढ़ें तो खेल की दुनिया में अब आपकी नजर ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने पर है। क्या लगता है वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दुती की रफ्तार ओलंपिक के क्वालीफाइंग मार्क को छू पाएगी?
देखिए, 100 मीटर में मेरा नेशनल रिकॉर्ड 11.24 सेकेंड का है, जबकि ओलंपिक का क्वालीफाइंग मार्क 11.15 सैकेंड है, तो मुश्किल तो बहुत है, लेकिन मैं 11.10 सेकेंड के हिसाब से तैयारी कर रही हूं। मेरी कोशिश पूरी रहेगी बाकी देखते हैं क्या होता है।
दोहा में 27 सितंबर से आयोजित हो रहे वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दुती चंद का इवेंट रात को होगा। इसके लिए दुती चंद रात में प्रैक्टिस कर रही हैं।
खेल के इतर दुती चंद की चर्चा राजनीति में भी हो रही है। हाल ही में उन्होंने ट्वीट किया है कि वह बचपन से राजनीति में आना चाहती हैं, उनकी मां भी उनके गांव में कभी सरपंच रहा करती थीं।
अब इस ट्वीट के कई मायने निकाले जा रहे हैं।
लोग उनके राजनीति में कदम रखने के कयास लगा रहे हैं। हालांकि, उनके ट्वीट के पीछे क्या वजह है ये वो ही बेहतर बता सकती हैं। मगर लोगों की जरूर दिलचस्पी रहेगी कि ओलंपिक की दौड़ या राजनीति में कदम, दुती चंद कहां अपनी रफ्तार पड़कती हैं।