विश्व डोपिंग निरोधक एजेंसी (वाडा) द्वारा भारत की राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (एनडीटीएल) को छह महीने के लिये निलंबित करने के फैसले पर खेल मंत्रालय ने शुक्रवार को आश्चर्य व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि इस फैसले के पीछे बड़ा व्यावसायिक हित हो सकता है।
इस प्रयोगशाला को 2008 में ही वाडा से मान्यता मिली थी। अब यहां पर नमूनों की जांच नहीं हो सकेगी और यह निलंबन 20 अगस्त से प्रभावी होगा। तोक्यो ओलंपिक में अब एक साल से भी कम समय रह गया है और यह फैसला भारत के लिये बेहद निराशाजनक है।
राष्ट्रीय डोपिंग निरोधक एजेंसी (नाडा) खून और मूत्र के नमूने एकत्र कर सकता है लेकिन उसे भारत के बाहर वाडा की मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से जांच करानी होगी जिससे इसका खर्च काफी बढ़ जाएगा।
खेल सचिव राधे श्याम जूलानिया ने पीटीआई से कहा, ‘‘वाडा की टीम सितंबर 2018 में भारत आयी थी और उन्होंने जो भी चिंताए जतायी थी हमने उन सभी को दुरूस्त किया। ऐसे में निलंबन का फैसला हमारे लिए एक आश्चर्य की तरह है क्योंकि वे उस बीमारी का इलाज कर रहे हैं जो पहले से ही ठीक हो गई है।’’
उन्होंनें कहा, ‘‘इस निर्णय के पीछे एक बहुत बड़ा व्यापारिक हित है क्योंकि हमारी प्रयोगशाला में परीक्षण की लागत दुनिया की दूसरी प्रयोगशालाओं से बहुत सस्ती है। पूर्वी अफ्रीका के कई देशों ने अपने नमूनों का परीक्षण करने के लिए हमसे संपर्क किया है और ऐसा लगता है कि वाडा को यह अच्छा नहीं लगा।’’
जूलानिया एनडीटीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी है। उन्होंने कहा कि वाडा बोर्ड में भारतीय प्रतिनिधि की कमी देश को महंगी पड़ी।
उन्होंने कहा, ‘‘वाडा में एशियाई देशों के चार प्रतिनिधि हैं लेकिन भारत से कोई नहीं है। इसलिए खेल मंत्री कीरेन रिजीजू ने वाडा को लिखा है कि जब भी कोई स्थान रिक्त होता है तो एक भारतीय सदस्य को शामिल करें।’’
जूलानिया ने कहा कि भारत एनडीटीएल के निलंबन के फैसले के खिलाफ अपील करने की जल्दबाजी में नहीं है क्योंकि देश ने पहले ही इस वर्ष के लिए नमूना परीक्षण का अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास सभी विकल्प मौजूद है। हम अपने पक्ष को अच्छे से तैयार करेंगे और अगले 18 दिनों में कोई ठोस फैसला लेंगे।’’