रागिनी अमर उजाला को बताती हैं कि उस वक्त अगर उनके पिता मान सिंह ने उनके लिए लड़ाई नहीं लड़ी होती तो शायद वह आज यहां नहीं होतीं। उस वक्त पिता का साथ केवल मामा ने दिया था। आज वही रिश्तेदार घर आकर उनके पिता के फैसले की सराहना कर रहे हैं। रागिनी को जबलपुर अकादमी में भारतीय टीम के कोच रिछपाल सिंह ने तैयार किया है।
फाइनल में 80 में से 79 का स्कोर करने वाले फिरोजपुर के सुखबीर सिंह हैंडबॉल में नेशनल तक खेल चुके थे। उनके बड़े भाई गुरलाल राष्ट्रीय स्तर के तीरंदाज रह चुके थे। सुखबीर खुलासा करते हैं कि घर वालों को हैंडबॉल पसंद नहीं था। वह स्कूल भी कम जाते थे बड़े भाई गुरलाल ने 2016 में एक दिन उनसे कहा कि हैंडबॉल छोड़ धनुष थाम ले। उसके बाद से वह पंजाबी यूनिवर्सिटी में कार्यरत भारतीय टीम के कोच सुरेंदर सिंह के साथ जुड़ गए। खास बात यह है कि जब दोनों तीरंदाजों ने मैड्रिड में गोल्ड जीता तो टीम के कोच भी सुरेंदर ही थे।