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क्रिकेट के अलावा देश में दूसरे खेलों की समझ नहीं, ऐसे ओलंपिक पदक नहीं आएंगे: रिजिजू

Sat, 11 Jul 2020 07:57 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

देश के 50 से ज्यादा प्रतिभागियों को इस कोर्स के लिए नामांकित किया गया है, जिसमें भारतीय खेल प्राधिकरण, राज्य सरकार, राष्ट्रीय खेल महासंघों और निजी क्षेत्र के व्यवसाय के अधिकारी हिस्सा लेंगे। 
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किरेन रिजिजू - फोटो : Twitter
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विस्तार
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भारतीय खेल मंत्री किरेन रिजिजू का मानना है कि देश में लोगों को खेलों के बारे में सही जानकारी नहीं। रिजिजू यह बोलने से भी नहीं हिचके कि ऐसे लोग संसद में भी मौजूद हैं। किरेन की माने तो देश में खेलों की परंपरा तो पुरानी है, लेकिन संस्कृति सही नहीं। अगर हमें ओलंपिक में पदक चाहिेए तो नए सिरे से पूरे तंत्र को सुधारना होगा। खेलों की गंभीरता लोगों को बतानी होगी, उनकी मानसिकता ही बदलनी होगी।

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लोगों की समझ पर उठाए सवाल
ईएलएमएस खेल संस्थान और अभिनव बिंद्रा संस्थान द्वारा आयोजित 'हाई परफोरमेंस लीडरशिप' कार्यक्रम की लॉन्चिंग के मौके पर खेल मंत्री ने कहा कि, 'मेरे साथी ज्योति कुमारी, कंबाला रेसर श्रीनिवास गौड़ा और रामेश्वर गुर्जर जैसे रातों-रात सोशल मीडिया सनसनी को ओलंपिक पदक का दावेदार बता रहे हैं। यह सुनकर ही हैरानी होती है। खेलों के बारे में भारतीय समाज में ज्ञान बहुत कम है। मैं अपने स्वयं के सहयोगियों को नीचा दिखाना नहीं चाहता, लेकिन संसद में भी कोई ज्ञान नहीं है।

साइकिल पर पिता को गुड़गांव से बिहार ले गई थी ज्योति

लॉकडाउन में साइकिल से दरभंगा पहुंचीं ज्योति - फोटो : social media
कोरोना के शुरुआती दौर में समूचे देश में लागू किए गए लॉकडाउन के दौरान 15 वर्षीय कुमारी ने अपने पिता के साथ आठ दिन में गुरुग्राम से बिहार तक का सफर तय किया था। चोटिल पिता को बिठाकर 1200 किमी तक साइकलि चलाने के बाद ज्योति ने राष्ट्रीय सुर्खियां बटोरीं थींस उन्हें साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा ट्रायल्स के लिए भी बुलाया गया था, जिसे ज्योति ने ठुकरा दिया था। इस बारे में किरेन रिजिजू कहते हैं कि, 'वह युवा लड़की थी, जिसने विषम हालातों में यह कदम उठाया, यह वाकई एक दुखद बात थी, लेकिन मेरे कुछ सहयोगी यह कहने लगे कि वह साइक्लिंग में भारत के लिए स्वर्ण पदक लाएगी। यह ज्ञान की कमी ही है, जो लोगों को इस तरह सोचने पर मजबूर करती है, बिना यह जाने कि ओलंपिक में साइक्लिंग का प्रारूप क्या हैं और स्वर्ण पदक जीतने के लिए क्या करना पड़ता है।

कर्नाटक के कंबाला रेसर गौड़ा का भी दिया उदाहरण

- फोटो : Twitter
बकौल रिजिजू, 'क्रिकेट के बारे में हर कोई जानता है, अंग्रेजों ने हमारे दिमाग में इस खेल को डाल दिया, लेकिन इसके अलावा दूसरे खेलों के बारे में हम कुछ नहीं जानते। मगर सभी को सिर्फ स्वर्ण पदक चाहिए।' कर्नाटक के भैंसा दौड़ में जॉकी रहे गौड़ा के बारे में भी कहा गया था कि वह 100 मीटर की दूरी 11 सेकंड में पूरी कर लेता है। कुछ ने सोशल मीडिया पर उन्हें भारत का उसेन बोल्ट बना दिया, इससे पहले मध्य प्रदेश के गुर्जर के रेसिंग कारनामे भी सोशल मीडिया पर सनसनी बन गए थे और अंततः उन्हें भी ट्रायल्स के लिए बुलाया गया, जहां वह आखिरी स्थान पर रहे थे। मुझे खेल प्राधिकरण के लोगों ने पहले ही यथास्थिति से अवगत करा दिया था।
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देश में खेल संस्कृति का आभाव

अभिनव बिंद्रा - फोटो : सोशल मीडिया
रिजिजू ने देश में खेल संस्कृति की कमी पर जोर देते हुए कहा कि पूरे माहौल को बदलने की आवश्यकता है ताकि भारत ओलंपिक में अधिक स्वर्ण पदक जीते। सिर्फ एक या दो आइकन के बूते आप अपने खिलाड़ी नहीं तैयार कर सकते। हम सिर्फ पदक और नतीजे चाहते हैं, लेकिन इसके लिए कोई एकजुट राष्ट्रीय प्रयास नहीं है, जिससे परिणाम निकल सकें। हम तब तक आगे कैसे बढ़ सकते हैं जब तक खिलाड़ियों और साथ ही प्रशासकों के लिए एक निश्चित कोर्स नहीं हो। भारत के एकमात्र व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा के ही खेल संस्थान ने इस ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस दौरान पूर्व शूटर भी वहीं मौजूद थे। इस अवसर पर अभिनव बिंद्रा ने कहा, 'अंत में जब प्रत्येक खिलाड़ी को अच्छी तरह ट्रेनिंग दी जाती है तो बहुत छोटी चीज ही अच्छे और बेहतरीन खिलाड़ी को अलग करती है। हाई परफोरमेंस में खिलाड़ियों की भर्ती करने में, ट्रेनिंग में काफी बारिकी से ध्यान दिया जाता है ताकि सरंचनात्मक और जवाबदेह तरीके से चैम्पियन तैयार किए जाए।'
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