छोटा से कमरा हो और बाहर बम धमाकों के चलते हर वक्त जान आफत में हो तो पहलवानी के बारे में सोचना समझदारी नहीं माना जाएगा, लेकिन अफगानी पहलवानों को रोजाना ऐसी परिस्थियों से दो-चार होना पड़ता है। बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और जकार्ता एशियाई खेलों में पदक की दावेदारी को ताल ठोंकने को तैयार हैं।
अफगानिस्तान के छह पहलवान फ्रीस्टाइल वर्ग में इन खेलों में खेलने जा रहे हैं। ड्रा के बाद अफगानी टीम ऑफिशियल अहमदी शीरी जान की पेशानी पर पड़ते बल बता रहे थे कि सब कुछ ठीक नहीं है। बात शुरू होते ही उनके मुंह से निकलता है, कुछ भी ठीक नहीं है। वह और उनकी टीम यहां पर हैं यह बहुत बड़ी बात है। अहमदी छूटते ही कहते हैं कि जहां रोजना बम धमाके हो रहे हों और लोगों की जान जा रही हो वहां पहलवानी कैसे हो सकती है?
बावजूद इसके उनकी टीम कुश्ती करती है। अहमदी खुलासा करते हैं कि जकार्ता आने से पहले काबुल में जहां उनकी टीम तैयारियां कर रही थी उसके पास ही बम धमाका हुआ जहां डेढ़ सौ से दो सौ लोगों की जान चली गई। यह रोजाना के हालात बन गए हैं, लेकिन क्या करें पहलवानों का जज्बा बनाकर रखना पड़ता है। इन परिस्थितियों में भी उन्हें उम्मीद है कि उनके दो पहलवान पदक जीत सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो बहुत बड़ी बात होगी।
अहमदी बताते हैं कि काबुल में उनकी टीम 12 बाई सात के कमरे में छोटे से मैट पर तैयारियां करके यहां आई है। काबुल में इतना बड़ा कोई हॉल नहीं है जहां फुलसाइज की 42 फुट मैट लगाई जा सके। अहमदी को भारतीय कुश्ती संघ से बहुत उम्मीद है। उनकी फेडरेशन ने संघ से बातकर भारत में तैयारियां कराने के लिए कहा है। उन्हें उम्मीद है कि इन परिस्थतियों में अफगानी पहलवानों का सहारा एक बार फिर भारत बनेगा।