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क्रिकेट के शोर में दब गई ऐतिहासिक गोल्ड जीतने वाली दुती चंद की उपलब्धि

Thu, 11 Jul 2019 08:34 PM IST
Rajeev Rai राजीव राय, अमर उजाला
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दुती चंद - फोटो : social media
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9 जुलाई यानि मंगलवार को 12वें वर्ल्ड कप का पहला सेमीफाइनल खेला जा रहा था, लेकिन रुक-रूककर हो रही बारिश की वजह से वो बाधित होता रहा। इस दौरान देशवासियों की दिलचस्पी इस बात में थी कि मैच दोबारा कब शुरू होगा? होगा तो कौन जीतेगा? डकवर्थ-लुईस नियम के तहत भारत को कितने रन का लक्ष्य मिलेगा? इन सारे सवालों के बाद रात के तकरीबन साढ़े दस बजे खबर आई कि अब मैच बुधवार यानि की 10 तारीख की दोपहर में तीन बजे दोबारा से शुरू होगा। इन खबरों के बाद देश सोने चला गया। 

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लेकिन उसी वक्त देश से मीलों दूर इटली में एक लड़की भारतीय तिरंगे का प्रतिनिधित्व करते हुए तकरीबन 150 मुल्कों के खिलाड़ियों के बीच इतिहास रचने को बेताब थी। 

भारतीय समयानुसार 10 जुलाई को सुबह डेढ़ बजे एक ट्वीट हुआ 'मैंने गोल्ड जीत लिया है'। लेकिन दुर्भाग्यवश उसपर देश में जश्न मनने की जगह सन्नाटा पसरा रहा। होता भी क्यों नहीं देश क्रिकेट के शोर में जो खोया हुआ था या यूं कहें कि रोहित, विराट और राहुल की बल्लेबाजी के इंतजार में सो गया था। 
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दिन बढ़ा और धीरे-धीरे खबर आगे बढ़ी, फिर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, खेल मंत्री किरेन रिजिजू समेत कई लोगों ने रिट्वीट कर बधाई देना शुरू किया। लेकिन इससे पहले कि वो ऐतिहासिक खबर देश के बीच लोगों तक पहुंचती, वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल मैच शुरू हो गया और फिर पूरा देश क्रिकेट के शोर में डूब गया और वो खबर फिर से खो गई। 

लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद एक बार फिर से वो खबर सबके बीच आई और लोगों ने क्रिकेट टीम की हार का गम भुलाने के लिए गोल्ड मैडल की जीत को मनाना शुरू कर दिया, लेकिन तब तक शायद बहुत देर हो चुकी थी। 

ऊपर क्रिकेट की बात शायद बहुत हो गई इसलिए अब उसे छोड़ते हैं और जानते हैं उस ट्वीट, गोल्ड मैडल, ऐतिहासिक जीत और चैंपियन के बारे में जिसने विश्व पटल पर तिरंगा लहराकर इतिहास रच दिया। 

ये ट्वीट भारत की स्टार धाविका दुती चंद द्वारा किया गया था। उन्होंने ये ट्वीट इटली में खेले जा रहे वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने और इतिहास रचने के बाद किया था। दुती ने 30वें समर यूनिवर्सिटी गेम्स में 100 मीटर कॉम्पिटिशन का गोल्ड मेडल ही नहीं जीता बल्कि वो इस खेल में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी भी बन गईं।  
 
 

बता दें कि वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स को ओलंपिक के बाद दुनिया का सबसे बड़ा टूर्नामेंट माना जाता है जहां तक़रीबन 150 देशों के खिलाड़ी भाग लेते हैं। 

 

 

कठिनाइयों से भरा रहा है दुती का जीवन 

दुती चंद - फोटो : pti

ओड़िसा के एक गरीब बुनकर परिवार में जन्मीं दुति ने काफी संघर्ष किया और कई तरह की परेशानियों से जूझते हुए आगे बढती रहीं। 23 साल की धाविका को आईएएएफ की हाइपरड्रोजेनिज्म (ये वो अवस्था है जब किसी लड़की या महिला में पुरुष हॉर्मोन्स का स्तर एक तय सीमा से ज़्यादा हो जाता है) नीति के कारण 2014-15 में खेलने की अनुमति नहीं दी, जिसके कारण वह 2014 राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में भाग नहीं ले पाईं। उन्होंने खेल अदालत में यह मामला उठाया और आखिर में जीत हासिल करने में सफल रहीं। 

दुती ने कहा था कि वो उस वक्त काफी टूट गई थीं और खेल पर अपना ध्यान नहीं लगा पा रही थीं। बकौल दुती, '2014 में मुझे शिविर से निकाल दिया गया, स्पोर्ट्स हॉस्टल में भी नहीं रहने दिया गया जिसकी वजह से प्रशिक्षण में बहुत परेशानी होती थी।  

परिवार ने छोड़ा साथ

दुती चंद - फोटो : अमर उजाला

इतना ही नहीं हाल ही में दुती ने अपने समलैंगिक होने और एक लड़की के साथ रिश्ते में होने की बात सार्वजनिक तौर पर स्वीकार की थी। लेकिन ये बात उनके परिवार को पसंद नहीं आई। ओडिशा के एक छोटे से गांव और गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली इस युवा लड़की को उसके ही परिवार का साथ नहीं मिला।  

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ओलंपिक में गोल्ड जीतना है सपना

दुती चंद

इतनी परेशानियों और देश की तरफ से उतना सम्मान नहीं मिलने के बावजूद दुती की हिम्मत और जज्बा कायम है और अब उनका सपना 2020 में टोक्यो में होने वाले ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने का है।

 
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