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खेल बजट में खेलों की तैयारियों पर पड़ सकती है मार

Thu, 31 Jan 2019 10:13 PM IST
Mukesh Jha हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला
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स्पोर्ट्स
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वित्त वर्ष 2019-20 के खेल बजट में खेल संघों के जरिए खिलाडियों और टीमों की तैयारियों को दी जाने वाली राशि पर बड़ी मार पड़ने जा रही है। इसका सीधा असर 2020 टोकियो ओलंपिक की तैयारियों पर पड़ सकता है।

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सच्चाई यह है कि इस वित्तीय वर्ष में खेल संघों के लिए आवंटित 342 करोड़ रुपये की राशि खर्च ही नहीं हो पाई है। 97 करोड़ रुपये के करीब इस मद में खर्च नहीं हो पाए हैं, जिसके चलते इस वित्तीय वर्ष केलिए मंत्रालय ने खेल संघों केलिए सिर्फ 245 करोड़ रुपये की मांग की है। खेल मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय से इस बार 1600 करोड़ रुपये के खेल बजट की मांग रखी है, जबकि इस वित्तीय वर्ष में बजट 1575.15 करोड़ का  है।

मंत्रालय के इस वित्तीय वर्ष के बजट में साई,  खेल संघ और खेलो इंडिया के लिए आवंटित पूरी राशि खर्च नहीं हो पाई है। इस बार के बजट में इन तीनों ही मदों पर कम राशि की मांग की गई है। स्पोट्र्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) का बजट 429.56 करोड़ निर्धारित था, जबकि संशोधित बजट (आरई) में इसे 395 करोड़ कर दिया गया। 34.56 करोड़ रुपये यहां कम खर्च हुए हैं, जिसके चलते साई का बजट 20.44 करोड़ कम 450 करोड़ मांगा गया है। इसी तरह खेलो इंडिया के 520.09 करोड़ के बजट में आरई 500.09 कर दिया गया। इस बार भी मंत्रालय ने खेलो इंडिया के लिए पांच सौ करोड़ मांगे हैं।
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मंत्रालय ने 135 करोड़ वापस मांग रखे हैं
खेल मंत्रालय ने संशोधित बजट में कम की गई 193.63 करोड़ की राशि में से 135 करोड़ रुपये वित्त मंत्रालय से वापस मांग रखे हैं। मंत्रालय ने हवाला दिया है कि अगर यह राशि वापस मिल जाती है तो उसकी ओर से वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए साई का बजट 485 करोड़ और खेल संघों का बजट 305.13 करोड़ मांगा जा सकता है। ऐसा होने पर खेल संघों का वार्षिक कार्यक्रम और तैयारियां प्रभावित नहीं होंगी।

एनएसडीएफ में मांगे 68 करोड़ ज्यादा
खेल संघों की राशि खर्च नहीं होने पर इस मद में कम हो रहे बजट की काट मंत्रालय ने नेशनल स्पोट्र्स डेवलपमेंट फंड (एनएसडीएफ) का अत्यधिक बजट मांग कर की है। मंत्रालय ने दो के मुकाबले इस बार एनएसडीएफ का 70 करोड़ बजट मांगा है। मंत्रालय का मानना है कि इस राशि से टॉप्स के जरिए ओलंपिक की तैयारियों को पूरा करने की कोशिश की जाएगी। वहीं कैश अवार्ड के लिए भी इस बार 39 करोड़ अधिक मांगे गए हैं। पिछली बार 11 के मुकाबले 50 करोड़ रुपये मांगे गए हैं।  

पीएफएमएस लागू नहीं होने पर खर्च नहीं हो सका पैसा
खेल संघों और साई का पैसा खर्च नहीं हो पाने की बड़ी वजह पब्लिक फाइनेंसियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) का पूरी तरह लागू नहीं हो पाना है। सरकार ने फैसला का कर रखा है कि पैसे का लेन-देन पीएफएमएस के जरिए होगा, जबकि खेल संघों  को इसमें दिक्कत आ रही है। खुद आईओए की ओर से इसकी जानकारी नहीं होने पर आपत्ति जताई जा चुकी है।

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