शरत कमल ने 17 साल पहले 2004 में अपना पहला ओलंपिक खेला था। उसके बाद वह बीजिंग 2008 और रियो 2016 ओलंपिक का भी हिस्सा रहे, लेकिन सही मायनों में इन मौकों पर वह कभी पदक के दावेदार नहीं रहे और न ही उनके मन ने कहा कि वह ओलंपिक पदक जीतने जा रहे हैं, लेकिन जुलाई माह में टोक्यो पहुंचने पर 39 साल के होने जा रहे शरत के मन में इस बार ओलंपिक पदक की घंटी बजी है।
शरत खुलासा करते हैं कि 2018 के जकार्ता एशियाई खेलों में जब उन्होंने मनिका बत्रा के साथ मिश्रित युगल का कांस्य जीता तब उन्हें विश्वास हुआ कि अब ओलंपिक में पदक आ सकता है।
जब एशिया में जीत सकते हैं तो ओलंपिक में क्यों नहीं
साई की ओर से कराई गई बातचीत में शरत खुलासा करते हैं कि उस वक्त उन्हें लगा कि जब एशियाई स्तर पर पदक आ सकता है तो अब ओलंपिक दूर नहीं है। दोहा में जब मनिका के साथ ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया और विश्व नंबर पांच कोरियाई जोड़ी को हराया तो यह विश्वास और मजबूत हो गया। देखा जाए तो शरत औ्र मनिका से ओलंपिक पदक महज तीन दौर ही दूर है।
एक दूसरे की हौसलाअफजाई हमारी ताकत
शरत के मुताबिक उन्होंने मनिका के साथ मिश्रित युगल की तैयारियां शुरू कर दी है। मनिका पिछले दो सप्ताह उनके साथ चेन्नई में थीं। जहां उन्होंने समन्वय और फुटवर्क पर काम किया है। शरत कहते हैं कि विरोधियों के लिए उनका सामना करना आसान नहीं है।
इसका कारण यह है कि मनिका कभी भी मुकाबले को धीमा कर सकती है और वह कभी इसमें तेजी ला सकते हैं। एक दूसरे के मजबूत पक्षों पर हौसलाअफजाई ही उनकी जोड़ी के अच्छे प्रदर्शन का राज है।