ट्रायल के फैसले ने कैंप में तीरंदाजों को गुटों में बांट दिया है। टीम में चयनित और ट्रायल की मांग कर रहे टीम में नहीं चयनित तीरंदाजों में मनमुटाव पैदा हो गया है। गुटों में बंटे तीरंदाज कैंप में आपस में एक दूसरे से बात करने से कतरा रहे हैं। बैंकाक में नवंबर में होने वाली ओलंपिक क्वालिफायर चैंपियनशिप की तैयारियों के लिए यह माहौल बिल्कुल भी ठीक नहीं है। यही नहीं पंजाब आर्चरी के अध्यक्ष पूर्व आईएएस केएस कंग और आंध्र प्रदेश आर्चरी के महासचिव सी सत्यनारायण ने दोबारा ट्रायल के मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया है। दोनों ने ईमेल के जरिए कहा है कि यह फैसला पहले से टीम में चयनित युवा तीरंदाजों के लिए घातक साबित होगा।
साई ने पहले ट्रायल सात से 11 अगस्त को कराए थे। उस वक्त साफ किया गया था कि ए टीम एशियाई चैंपियनशिप और बी टीम एशिया कप में खेलेगी। टीम में चयनित तीरंदाजों ने आपस में तैयारी भी शुरू कर दी थी। पुरुष रीकर्व में तरुणदीप, धीरज, अतुल वर्मा, अतानु दास और महिला में दीपिका कुमारी, अंकिता, सिमरनजीत और संगीता का चयन हुआ था। महिलाओं के लिए यह टूर्नामेंट बहुत महत्वपूर्ण है। यहां व्यक्तिगत इवेंट में टॉप चार में रहने वाली महिलाओं को ओलंपिक टिकट मिलना है। अतानु, धीरज, दीपिका समेत दूसरे तीरंदाजों ने खेल मंत्री को लिखे ईमेल में दोबारा ट्रायल कराने के पीछे कारण बताने को कहा है। उन्हें इसे पूरी तरह गलत करार दिया है।
दो बार के एशियन गेम्स पदक विजेता तरुणदीप रॉयक का कहना है कि उन्होंने टीम के बाकी सदस्यों के साथ काफी अच्छा तालमेल बना लिया है। अब आधा रास्ता निकलने जाने के बाद फिर से टीम बनाना चैंपियनशिप केलिए अच्छा नहीं है। इससे निश्चित रूप से प्रदर्शन प्रभावित होगा।
कोर्ट की ओर से स्थापित अस्थाई समिति ने दोबारा ट्रायल का फैसला तीन सदस्यीय चयन समिति पर छोड़ दिया। इसमें दो बार के ओलंपियन लालरेम सांगा भी शामिल थे। उन्होंने भी कहा कि दोबारा ट्रायल का फैसला देशहित में नहीं होगा। इससे प्रदर्शन प्रभावित होगा। लेकिन बाकी दो सदस्य जोरिस, मैथ्यु ट्रायल के हक में थे। रीकर्व के ट्रायल 10 और 11 को पुणे में जबकि कंपाउंड के ट्रायल 13 और 14 को रोहतक में रखे गए हैं।