पूर्वी अफ्रीकी देश इरिटरियन हिंसाग्रस्त, मानवाधिकार को लेकर भी वहां रिकॉर्ड बेहद खराब है। युद्ध की विभीषका से भी देश जूझता रहा है। वहीं के शरणार्थी खिलाड़ी इस समय स्विट्जरलैंड में अपनी ओलंपिक तैयारियों को अंजाम दे रहे हैं।
उनमें से एक हैं लूना सोनोमोन जो निशानेबाज हैं और उनका लक्ष्य 10 मीटर एयर राइफल में ओलंपिक में भागीदारी करना है। यहां शरणार्थी शिविर में दर्जनों ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें टोक्यो में भाग लेने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) इनकी एक टीम बनाना चाहती है।
लूना कहतीं है, मेरे अपने देश में हाल खराब है, वहां बंदूक किसी दूसरे पर गोली चलाने के लिए उठाई जाती रही है। वहां राइफल को खेल से नहीं हिंसा से जोड़कर देखा जाता है। सोलोमोन ने 2015 में अपना देश छोड़कर शरण ले ली थी। अब इटली की ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता निकोलो कैप्रियानी उनकी कोच है जो पूर्व विश्व चैंपियन भी रह चुकी हैं।
रियो में भी उतरी थी शरणार्थियों की टीम
आईओसी ने पहले 2016 रियो डि जेनेरियो में पहली बार शरणार्थी खिलाड़ियों की एक टीम बनाई थी ताकि ऐसे खिलाड़ियों के मुद्दे को सामने लाया जा सके। उस साल मध्यपूर्व, अफ्रीका और मध्य एशिया से लाखों शरणार्थी यूरोप पहुंचे थे। तब सीरिया, कांगो, इथियोपिया और दक्षिणी सूडान के खिलाड़ियों की दस सदस्यीय टीम ने एथलेटिक्स, तैराकी और जूडो में हिस्सा लिया था।
13 : देशों के 55 शरणार्थी खिलाड़ी तैयारी कर रहे हैं, टीम का चयन जून में होना है