बॉक्सर विजेंदर कुमार की रियो ओलंपिक की राह में उनके प्रमोटर रोड़ा बन गए हैं। विजेंदर ने जहां पेशेवर बॉक्सरों के लिए वेनेज्वेला में रखे गए ओलंपिक क्वालीफाइंग में खेलकर रियो जाने की इच्छा जताई है।
वहीं उनके इंग्लैंड के प्रमोटर क्वींसबरी के फ्रांसिस वॉरेन ने साफ कर दिया है कि विजेंदर ऐसा नहीं कर सकते हैं। अगर वह उनकी इच्छा के खिलाफ जाते हैं तो वह खलनायक की भूमिका निभाने पर मजबूर होंगे। एडहॉक कमेटी ने भी इशारा किया है कि बीजिंग ओलंपिक मेडलिस्ट के लिए अब रियो ओलंपिक में जाना संभव नहीं होगा।
विजेंदर की दिल्ली में 16 जुलाई को आस्ट्रेलिया के चैंपियन केरी होप के साथ होने जा रही एशिया टाइटल बाउट से पहले इस मुद्दे को लेकर प्रमोटर के साथ टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। हालांकि विजेंदर का कहना है कि वह हर मुद्दे पर प्रमोटर के साथ बात करेंगे। प्रमोटर को भी उनसे फायदा है, इसलिए उन्हें उनके हित की भी बात सोचनी होगी। वह फिर से ओलंपिक में खेलना चाहते हैं। उन्हें लगता है उनकी तैयारियां अच्छी हैं।
वॉरेन का कहना है कि विजेंदर ने उनके साथ अनुबंध किया है। वह इसे नहीं तोड़ सकते हैं। उनकी बाउट में समय काफी कम है। वह अपने पैसे को बर्बाद नहीं होने देंगे। उन्होंने ओलंपिक में खेलने के लिए विजेंदर पर लाखों डॉलर नहीं लगाए हैं।
दरअसल विजेंदर को ओलंपिक क्वालीफाइंग में खेलने के लिए डब्लूबीए छोड़ आईबा प्रो बॉक्सिंग (एपीबी) के साथ अनुबंध करना पड़ सकता है। एडहॉक कमेटी चेयरमैन किशन नरसी का भी यही कहना है कि विजेंदर को उनका प्रमोटर इतना आसानी से नहीं छोड़ेगा। वह उन्हें ऐसा करने पर कानूनी झमेलों में फंसा सकता है।
नरसी का कहना है कि विजेंदर को क्वालीफाइंग में खेलने से पहले भारत में ही विकास कृष्ण की चुनौती का सामना होगा। विजेंदर का कहना है कि अगर विकास ओलंपिक कोटा ले लेते हैं तो वह 81 किलो भार में किस्मत आजमा सकते हैं। इस पर नरसी का कहना है कि यहां उन्हें सुमित सांगवान से खेलना पड़ सकता है।
इन सारी अड़चनों के बाद विजेंदर प्रमोटर से बात करने जा रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि प्रमोटर उनकी भावनाओं को समझेगा। उसके बाद ही ओलंपिक के मुद्दे पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।