भारत की दीपा कर्मकार ओलंपिक में बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद जिमनास्टिक के वॉल्ट इवेंट में चौथे नंबर पर रहीं। वो बडे मामूली अंतर से कांस्य पदक से चूक गईं।
इसके बावजूद दीपा के प्रदर्शन की खासी तारीफ हो रही है और उन्हें भविष्य के लिए भारत की उम्मीद बताया जा रहा है। दीपा ने कहा कि लोग पहले जिम्नास्टिक के बारे में पूछते थे- 'क्या ये सर्कस है?'
पढिए दीपा कर्मकार से बातचीत के खास अंश
"मेरे पापा वेट-लिफ्टिंग कोच थे लेकिन उनको जिम्नास्टिक्स पसंद था। वो मुझे जिम्नास्टिक्स में लाए। मेरी पहली कोच सुमानंदी थीं और उसके बाद मेरे कोच हुए बिश्वेश्वर नंदी।
पहले मुझे ये इतना पसंद नहीं था और मैं जानती भी नहीं थी कि मुझे ये आगे भी जारी रखना होगा। 2007 में जूनियर खेलने के बाद मुझे लगा कि मुझे इसे आगे जारी रखना है।
2010 के बाद शिव कुमार को मेडल मिला तो मैंने इसे जारी रखने का पक्का इरादा कर लिया।