ओलंपिक में पहले स्थान पर आने वाले खिलाड़ी को बतौर पुरस्कार दिए जाने वाले स्वर्ण पदक का बाजार भाव महज 50 हजार रुपये है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन स्वर्ण पदकों को रिसाइकल की गई चांदी से तैयार किया जाता है।
लगभग 99 फीसदी चांदी से बने इन पदकों में सोने की मात्रा सिर्फ 1.2 प्रतिशत होती है, जिसे पदक पर सोने की परत चढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
ओलंपिक खेलों के लिए पदक तैयार करने वाले बरबर्ट बताते हैं कि इन स्वर्ण पदकों को 24 घंटों के भीतर 80 लोगों की टीम तैयार करती है।
शुरुआत से ओलंपिक स्वर्ण पदक बनाने की यही व्यवस्था नहीं थी। आखिरी बार पूरी तरह सोने से तैयार किए गए स्वर्ण पदक साल 1912 में स्वीडन में आयोजित ओलंपिक खेलों में दिया गया था।
इसके बाद ओलंपिक खेलों में रिसाइकल चांदी से तैयार किए गए स्वर्ण पदकों का इस्तेमाल किया जाने लगा। इसके निर्माण में उपयोग होने वाली चांदी को एक्स-रे प्लेट और आइनों से निकाली जाती है। इन स्वर्ण पदकों का वजन लगभग 500 ग्राम होता है।