डोप में फंसे पहलवान नरसिंह यादव सिर्फ नाडा ही नहीं बल्कि वाडा के भी निशाने पर थे। यह वाडा ही था जिसने नाडा से नरसिंह यादव का ब्लड सैंपल लेने को कहा था। नाडा ने जब 25 जून और पांच जुलाई को वाडा के कहने पर उनका ब्लड सैंपल लिया तो उसने खुद से ही उनका यूरिन सैंपल भी ले लिया।
हैरानी की बात यह है कि 25 जून और पांच जुलाई के ब्लड सैंपल में नरसिंह पाक-साफ निकले हैं, लेकिन इनके साथ ही लिए गए उनके यूरिन सैंपल में एनॉबॉलिक स्टेरॉयड पाया गया है।
दरअसल दो जून को नाडा ने नरसिंह का यूरिन सैंपल लिया था, जिसमें वह ठीक निकले। इसके बाद वाडा ने निर्देश दिए कि नरसिंह का ब्लड सैंपल लेकर उनके कुछ टेस्ट लिए जाएं।
नाडा के सूत्रों का कहना है कि यह ब्लड सैंपलिंग ऐसी थी कि एक सैंपल में टेस्टिंग नहीं हो सकती थी। जिसके चलते उनकी ब्लड सैंपलिंग 25 जून और पांच जुलाई को की गई। सूत्रों का कहना है कि ब्लड सैंपल के साथ नरसिंह का यूरिन सैंपल लेने की कोई योजना नहीं थी, लेकिन नाडा टीम ने सोचा जब उनका ब्लड सैंपल लिया जा रहा है तो क्यों नहीं साथ में यूरिन सैंपल ले लिया जाए।
यहीं नरसिंह बदकिस्मत साबित हुए। नाडा सूत्रों का कहना है कि अगर इन दोनों ही दिनों में वाडा के कहने के अनुसार नरसिंह का केवल ब्लड सैंपल लिया गया होता तो शायद वह ओलंपिक में खेलने का हक रख रहे होते।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लड और यूरिन सैंपल के परिणाम अलग-अलग आ सकते हैं, लेकिन ऐसा कम होता है। यहां भी नरसिंह दुर्भाग्यशाली रहे। नाडा के महानिदेशक नवीन अग्रवाल पुष्टि करते हैं कि नरसिंह के ब्लड सैंपल में कुछ नहीं निकला है।
नरसिंह समेत 12 खिलाड़ी थे वाडा के निशाने पर
सिर्फ नरसिंह यादव ही नहीं बल्कि वाडा के निशाने पर भारत के 12 खिलाड़ी थे। इनमें सिर्फ नरसिंह ही थे जिनका ब्लड सैंपल लेने को कहा गया। बाकी 11 खिलाड़ियों में बॉक्सर शिवा थापा, विकास कृष्ण, पहलवान संदीप तोमर, वेटलिफ्टर सतीश शिवालिंगम और, मीराबाई चानू के अलावा रियो नहीं जाने वाले लिफ्टर विकास ठाकुर, आरवी राहुल, संजीता चानू समेत छह लिफ्टर शामिल थे। खास बात यह है कि नरसिंह को छोड़ सभी खिलाड़ियों के यूरिन सैंपल नेगेटिव पाए गए हैं।
वहीं नरसिंह के स्थान रियो भेजे जा रहे पहलवान प्रवीण राणा को बगैर डोप टेस्ट के जार्जिया भेजा गया है। दरअसल नाडा को नरसिंह के विवाद के चलते इतना समय ही नहीं मिला कि प्रवीण का डोप टेस्ट किया जा सके।
हालांकि नाडा अब कोशिश कर रहा है कि किसी तरह रियो जाने से पहले प्रवीण का डोप टेस्ट करा लिया जाए। नाडा महानिदेशक नवीन अग्रवाल का कहना है कि प्रवीण का डोप सैंपल जार्जिया में लिए जाने की कोशिशें चल रही हैं।
इस बीच नाडा हियरिंग पैनल की ओर से नरसिंह यादव के मामले में शुक्रवार को एक बार फिर सुनवाई की गई। हालांकि नाडा की ओर से गुरुवार को यह साफ किया गया था कि सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रख लिया गया है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पैनल ने इस मामले में नरसिंह की ओर से रखे गए गवाहों को तलब कर लिया। जहां उनसे मौखिक और लिखित में गवाही दर्ज कराई गई।
संकट में नरसिंह, उनका एक गवाह अपने बयान से मुकरा
नरसिंह यादव
सूत्र बताते हैं कि बात जब लिखित बयान की आई तो दो में से एक गवाह मुकर गया। गवाह मुकरने की स्थिति में मामला नरसिंह के खिलाफ जा सकता है। ऐसे में उन पर प्रतिबंध लगना लगभग तय हो गया है।
सूत्र बताते हैं कि नरसिंह ने सोनीपत कैंप की मेस में काम करने वाले दो रसोइयों राहुल और विजय को बतौर गवाह पेश किया था। उनकी ओर से कहा गया था कि इन दोनों एक जूनियर पहलवान को दाल में मिलावट करते देखा था।
लेकिन सूत्र बताते हैं कि इनमें से एक गवाह मुकर गया, उसने लिखित में बयान दिया है कि उसने किसी को भी मिलावट करते नहीं देखा। इसी तरह नरसिंह की ओर से दलील दी गई थी कि बुल्गारिया से लौटने के बाद 23 व 24 जून को ट्रेनिंग के दौरान उनके पानी में इसी पहलवान की ओर से मिलावट की गई, लेकिन गवाह इसके बारे में भी कोई ठोस सुबूत नहीं दे सके।
गवाहों के बयान के बाद पैनल ने फैसले को सुरक्षित रख लिया है। अब पैनल शनिवार को या फिर सोमवार को नरसिंह के भाग्य के बारे में फैसला सुना सकता है।
वहीं जद(यू) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव भी नरसिंह के समर्थन उतर आए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में सीबीआई से जांच कराने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि यह शर्म की बात है कि नरसिंह अपने ही देश में गलत उद्देश्यों की वजह से अपने विरोधियों के शिकार बन गए। शरद यादव ने कहा कि वह बेहद प्रतिभावान और मजबूत पहलवान है।