यही नहीं साई ने उनकी ट्रेनिंग के लिए गांव में जो प्लेटफार्म और वेटलिफ्टिंग सेट मुहैया कराया है उसे भी उन्होंने गांव के प्रतिभाशाली बच्चों के लरए खोल रखा है। वह पटियाला में एक स्कूटी खरीदना चाहती थीं लेकिन कोच ने मना कर दिया कि इसकी जरूरत नहीं है। एक साइकिल ले लो। उन्होंने यही किया। वह साइकिल से एनआईएस में इधर उधर जाती हैं।
मीरा मानती हैं कि खेल रत्न मिलने पर उनकी अब ओलंपिक पदक के लिए जिम्मेदारी और बढ़ गई है। वह अगले वर्ष अप्रैल में एशियाई चैंपियनशिप से वापसी करेंगी। फिल्हाल वह अक्तूबर माह तक मुंबई में ही हीथ मैथ्यूज के पास रहकर इलांज और ट्रेनिंग एक साथ करेंगी।
मणिपुर से पहली बार बाहर निकली मां
मीरा अवार्ड के लिए अपनी मां को साथ लेकर आई है। वह बताती हैं कि उनकी मां पहली बार मणिपुर से बाहर निकली हैं। उन्होंने मणिपुर के अलावा कुछ नहीं देखा है। उन्होंने पहली बार इतना बड़ा होटल देखा है। हालांकि उन्होंने भी कभी इंडिया गेट नहीं देखा है। अब वह मां को लेकर इंडिया गेट जाएंगी। राष्ट्रपति भवन में अवार्ड कार्यक्रम के लिए मीरा को साड़ी बांधनी थी। उन्हें साड़ी पहनना अच्छा लगता है, लेकिन इसे बांधना नहीं आता है। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में कोच हंसा शर्मा ने उनकी साड़ी बांधी। यहां उनकी साड़ी बांधना के इंतजाम साई ने कराया है।