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वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में पदक को लेकर आश्वस्त था: मनीष कौशिक

Sat, 21 Sep 2019 07:52 AM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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Manish Kaushik - फोटो : social Media
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विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप के अपने पहले अभियान में कांस्य पदक जीतने वाले मनीष कौशिक (63 किग्रा) ने कहा कि वह चयन परीक्षण में सफलता हासिल करने के बाद से ही प्रतियोगिता में पदक जीतने को लेकर आश्वस्त थे। हरियाणा में मुक्केबाजी का गढ़ कहे जाने वाले भिवानी से महज पांच किलोमीटर दूर देवसार गांव के 25 साल के इस खिलाड़ी को रूस के एकातेरिनबर्ग में चल रही प्रतियोगिता में क्यूबा के शीर्ष वरीय एंडी गोमोज क्रूज से हार कर कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। 

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उन्होंने तीन बार के एशियाई पदकधारी और 2015 के कांस्य पदक विजेता (विश्व चैम्पियनशिप) शिव थापा के खिलाफ चयन परीक्षण में मिली जीत की ओर इशारा करते हुए कहा, 'मेरा ड्रा काफी चुनौतीपूर्ण था। वहां जाने के लिए भी मुझे मुश्किल ट्रायल का सामना करना पड़ा जहां अनुभवी शिव की चुनौती थी। शिव को हराने के बाद मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ गया कि मैं पदक जीतूंगा।'

कौशिक पहली बार विश्व चैम्पियनशिप में खेल रहे थे लेकिन पिछले साल राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने वाले इस खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का अनुभव था। कौशिक अपनी सफलता का श्रेय ओलंपिक में देश के लिए इस खेल का पहला पदक जीतने वाले मुक्केबाज विजेन्दर सिंह को देते है। विजेन्दर ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक हासिल किया था। भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर तैनात इस खिलाड़ी ने कहा, 'हरियाणा में मुक्केबाजी की लोकप्रियता का श्रेय विजेन्दर को जाता है। मैंने अपने गांव देवसर में खिलाड़ियों को मुक्केबाजी का प्रशिक्षण लेते देखा है। मुझे यह आकर्षक लगा जिसके बाद मैंने इसे करियर के तौर पर अपनाने का फैसला किया।'
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किसान परिवार से आने वाले कौशिक ने कहा कि शुरुआत में खेलों की तरफ उनका रूझान नहीं था और उनके परिवार से भी कोई खेल में नहीं था। उन्होंने कहा, 'ऐसा नहीं है कि मैं शुरू से ही खिलाड़ी बनना चाहता था लेकिन जब मैंने मुक्केबाजी देखनी शुरू की तब मैंने इसमें हाथ आजमाने का फैसला किया।'

कौशिक ने कहा कि जब उन्होंने मुक्केबाजी शुरू की तब चेहरे पर लगी चोट से परिवार के लोग परेशान रहते थे लेकिन समय के साथ सब ठीक हो गया। उन्होंने कहा, 'शुरू में जब वे चेहरे में कटने या चोट का निशान देखते थे तो नाराज हो जाते थे लेकिन धीरे-धीरे सब ठीक हो गया। जब उन्हें मेरी पसंद का पता चला तब उन्होंने मेरा समर्थन करना शुरू कर दिया। उन्हें गौरवान्वित करने पर मुझे फख्र है।'

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