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कोबी ब्रायंट: कभी हार न मानने के जज्बे ने बनाया महान, विराट समेत पूरे खेल जगत का सलाम

Mon, 27 Jan 2020 01:18 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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कोबी ब्रायंट - फोटो : ट्विटर
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कभी हार न मानने के जज्बे, कड़ी प्रतिस्पर्धा और सटीकता के कारण कोबी ब्रायंट एनबीए के दिग्गज बने और वह अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए, जिसने नेशनल बास्केटबॉल लीग की नई पीढ़ी और दुनिया भर के प्रशंसकों को प्रेरित किया। इस खिलाड़ी की मौत से अमेरिका की सड़कों पर लोग रो रहे हैं। दुनियाभर का खेल जगत शोकाकुल है। भारतीय कप्तान विराट कोहली हो या स्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो सभी ने कोबी से जुड़ी अपनी याद ताजा की।

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कोबी ब्रायंट - फोटो : ट्विटर
टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर लिखा, 'आज इस खबर को सुनकर बहुत दुखी हूं। बचपन की कई यादें जुड़ी हैं। सुबह जल्दी उठकर कोर्ट पर उनकी जादूगरी देखना, जिससे मैं मंत्रमुग्ध हो जाता था। जीवन कितना अप्रत्याशित और अस्थिर है। दुर्घटना में उनकी बेटी गियाना की भी मौत हो गई। मैं इससे बहुत आहत हूं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। परिवार के प्रति संवेदना. ईश्वर उन्हें मजबूती प्रदान करे।
 

ओपनर रोहित शर्मा ने भी ब्रायंट के निधन पर शोक जताया है। रोहित शर्मा ने लिखा, 'खेलजगत के लिए दुखभरा दिन। खेल के महानतम प्लेयर्स में से एक इतनी जल्दी विदा हो गया। कोबी, ब्रायंट उनकी बेटी और हादसे में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि।'
 

वेस्टइंडीज के महानतम क्रिकेटर रहे विवियन रिचर्ड्स ने कहा, 'खेल जगत का वास्तविक दिग्गज। कोबी और उनकी बेटी की आत्मा को ईश्वर शांति प्रदान करे। ईश्वर परिवार को इस दुख की घड़ी से उबरने की शक्ति दें।'
 
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क्यों महान कहलाते थे कोबी ब्रायंट

कोबी - फोटो : self
ओलंपिक में अमेरिका को दो गोल्ड मेडल दिलाने वाले बास्केटबॉल खिलाड़ी ब्रायंट की रविवार को 41 साल की उम्र में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई। वह लॉस एंजिलिस लेकर्स के साथ 20 साल तक जुड़े रहे और इस दौरान उनकी टीम ने पांच एनबीए खिताब जीते।

कोबी बीन ब्रायंट पूर्व एनबीए खिलाड़ी जो 'जेलीबीन' ब्रायंट के बेटे थे। उनका 23 अगस्त 1978 को फिलाडेल्फिया में जन्म हुआ था। ब्रायंट ने शाकिल ओ नील के साथ मिलकर लेकर्स को 2000, 2001 और 2002 में खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। इस तरह से वह 23 साल की उम्र में तीन खिताब जीतने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने थे। इसके बाद ओ नील ने ब्रायंट के साथ झगड़े के कारण लेकर्स को छोड़ दिया। इससे ब्रायंट का खेल भी प्रभावित हुआ और इसके बाद स्पेन के पाउ गैसोल के आने तक उनकी टीम कोई खिताब नहीं जीत पाई।

ब्रायंट की अगुवाई में लेकर्स ने 2009 और 2010 में खिताब जीते। बाद में उनकी ओ नील से सुलह हो गई थी। ब्रायंट की अगुवाई में अमेरिका की ओलंपिक टीम ने 2008 बीजिंग ओलंपिक और 2012 लंदन ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीते थे। इससे वह वैश्विक हस्ती बन गए थे। अपने चमकदार करियर में कुल 33,643 अंक बनाने वाले ब्रायंट को 18 बार एनबीए ऑल स्टार चुना गया। ब्रायंट को 2008 में एनबीए का सबसे उपयोगी खिलाड़ी चुना गया था।
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