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देश की शोभा में चार चांद लगाती हैं बेटियां, साउथ एशियन गेम्स में दो मेडल जीतकर लौटीं शूटर काजल सैनी

Fri, 06 Dec 2019 06:36 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Kajal Saini Rifle Shooter - फोटो : AmarUjala
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बेटियां हैं, उन्हें फूल की तरह खिलने दें। पढ़ने दें, खेलने दें और समाज उन्हें सुरक्षा प्रदान करे। इसके बाद देखें कि ये बेटियां कैसे देश की शोभा में चार चांद लगाती हैं। हमारे सभ्य समाज में लड़कियों को देखने का नजरिया बदलना होगा। नेपाल में चल रहे 13वें साउथ एशियन गेम्स में दो मेडल जीतकर शुक्रवार को स्वदेश लौटी राइफल शूटर काजल सैनी ने यह बात कही है। इससे पूर्व, नवंबर माह में कतर के दोहा शहर में हुई 14वीं एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में भी काजल ने गोल्ड और ब्रांज मेडल हासिल किया था। उन्होंने एक महीने में चार इंटरनेशनल मेडल जीत कर देश का नाम रोशन किया है।

आसान नहीं था इंटरनेशनल मेडल जीतना

साउथ एशियन गोल्ड मेडलिस्ट काजल सैनी का कहना है कि उसके लिए इंटरनेशनल मेडल जीतना आसान नहीं था। वजह, उनके अलावा परिवार के किसी अन्य सदस्य ने न तो कभी शूटिंग गेम खेला है और न ही उन्हें इसके बारे में ही कोई ज्यादा जानकारी थी। इसके बावजूद परिजनों ने हर कदम पर उनका साथ दिया। इसी का नतीजा है कि वह एक माह में चार इंटरनेशनल मेडल जीतने में कामयाब रहीं। काजल मूलत: रोहतक की रहने वाली हैं।

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वह रोहतक के राजकीय महिला कालेज में एनसीसी कैडेट रही हैं और उन्होंने शूटिंग की शुरुआत एनसीसी से ही की थी। भले ही शुरुआत में उसे कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन काजल ने हार नहीं मानी।

टोक्यो ओलंपिक की तैयारी

हरियाणा में 50 मीटर राइफल शूटिंग की प्रेक्टिस के लिए कोई रेंज न होने से उन्हें चार साल पूर्व दिल्ली में अपने मामा के घर नजफगढ़ शिफ्ट होना पड़ा। यहां से वह हर रोज तुगलकाबाद स्थित डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज के लिए बस से रवाना होती हैं। वहां दिनभर प्रेक्टिस कर शाम को वापस लौटती थीं। नजफगढ़ पहुंचने पर काजल का भव्य स्वागत किया गया। काजल ने कहा कि उनका अगला लक्ष्य टोक्यो ओलंपिक के लिए जल्द होने वाले ट्रायल में अच्छा प्रदर्शन कर भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की करना है।

गौरतलब है कि भारत को 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन में ओलंपिक कोटा हासिल है। उन्होंने कहा कि शूटिंग गेम काफी खर्चीला होने के बावजूद उनके माता-पिता ने उन्हें ट्रेनिंग के दौरान कभी भी पैसों की दिक्कत नहीं आने दी।

किराए की राइफल से प्रैक्टिस

इस प्रतिभाशाली युवती ने किराए की राइफल से शूटिंग गेम की प्रैक्टिस शुरू की। एक बार ऐसा भी हुआ कि जब मैच से तुरंत पहले उसे किराये की राइफल भी नसीब नहीं हो पाई। मजबूरी के चलते उसे किसी अन्य खिलाड़ी की राइफल मांगकर मैच खेलना पड़ा। नतीजा, काजल वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई, जिसकी वह खुद उम्मीद कर रही थी। पिता की हैसियत नहीं थी कि वह उसे लाखों रुपये की राइफल खरीद कर दे सकें। हालांकि उन्होंने हर कदम पर अपनी हैसियत से बढ़कर काजल की कोशिश की।

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आखिरकार, उसने कतर की राजधानी दोहा में हाल ही में संपन्न हुई 14वीं एशियन शूटिंग चैंपियनशिप के प्रोन और 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन (टीम इवेंट) में क्रमशः गोल्ड व कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा तो मनवाया ही, साथ ही साथ विपरित परिस्थितियों में आगे बढ़ने की एक नई मिसाल भी कायम की। काजल के पिता विजय सैनी दिल्ली के फायर ब्रिगेड विभाग में कार्यरत हैं और फायर सर्विसेज के कनॉट प्लेस दफ्तर में तैनात हैं। 

उधार के पैसों से खरीदी राइफल

विजय सैनी ने बताया कि तुगलकाबाद में प्रैक्टिस करने के बाद काजल के खेल में धीरे-धीरे सुधार आता गया और उन्होंने साल 2017 व 2018 में केरला में हुई नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में चौर गोल्ड समेत नौ मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनावाया। चूंकि किराये की राइफल के बार-बार बदलने से काजल को खेलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, इसलिए साल 2017 में उन्होंने अपने रिश्तेदारों से पैसे उधार मांगकर काजल के लिए एक नई राइफल खरीदी, ताकि वह बिना किसी दिक्कत के अपनी प्रैक्टिस कर सकें।

उन्होंने बताया कि इसी नई राइफल से काजल ने जयपुर में हुई ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता। इस प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन मलेशिया में हुए वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स के लिए हुआ, जहां मामूली अंतर से वह पदक जीतने से चूक गईं।

एनसीसी कैंप से शुरू हुआ सफर

इस प्रतिभावान खिलाड़ी ने बताया शूटिंग गेम में उनका पदार्पण चार साल पूर्व संयोग से उस समय हुआ, जब वह बीएससी द्वितीय वर्ष के दौरान एनसीसी की कैडेट थीं। एनसीसी कैंप में शूटिंग की एक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें उसने पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद मेरी प्रतिभा को देखते हुए एनसीसी कैंप इंचार्ज ने मेरे पिता को मुझे शूटिंग गेम में करियर बनाने की सलाह दी। उसके बाद से ही मैंने शूटिंग को अपने जीवन में आत्मसात कर लिया।

मेरे लिए इस गेम में आगे बढ़ना आसान नहीं था, क्योंकि मेरे परिवार के किसी भी सदस्य ने न तो इस गेम को कभी खेला है और न ही इस गेम के बारे में कोई जानकारी थी। बावजूद इसके, न मेरे परिजनों और न ही मैंने कभी हौंसला हारा और तमाम मुश्किलों के बावजूद अपने आगे बढ़ती रही। एशियन मेडल जीतने के बाद अब उनका लक्ष्य वर्ल्ड कप व ओलंपिक में मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करना है।

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