साउथ एशियन गोल्ड मेडलिस्ट काजल सैनी का कहना है कि उसके लिए इंटरनेशनल मेडल जीतना आसान नहीं था। वजह, उनके अलावा परिवार के किसी अन्य सदस्य ने न तो कभी शूटिंग गेम खेला है और न ही उन्हें इसके बारे में ही कोई ज्यादा जानकारी थी। इसके बावजूद परिजनों ने हर कदम पर उनका साथ दिया। इसी का नतीजा है कि वह एक माह में चार इंटरनेशनल मेडल जीतने में कामयाब रहीं। काजल मूलत: रोहतक की रहने वाली हैं।
हरियाणा में 50 मीटर राइफल शूटिंग की प्रेक्टिस के लिए कोई रेंज न होने से उन्हें चार साल पूर्व दिल्ली में अपने मामा के घर नजफगढ़ शिफ्ट होना पड़ा। यहां से वह हर रोज तुगलकाबाद स्थित डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज के लिए बस से रवाना होती हैं। वहां दिनभर प्रेक्टिस कर शाम को वापस लौटती थीं। नजफगढ़ पहुंचने पर काजल का भव्य स्वागत किया गया। काजल ने कहा कि उनका अगला लक्ष्य टोक्यो ओलंपिक के लिए जल्द होने वाले ट्रायल में अच्छा प्रदर्शन कर भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की करना है।
गौरतलब है कि भारत को 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन में ओलंपिक कोटा हासिल है। उन्होंने कहा कि शूटिंग गेम काफी खर्चीला होने के बावजूद उनके माता-पिता ने उन्हें ट्रेनिंग के दौरान कभी भी पैसों की दिक्कत नहीं आने दी।
इस प्रतिभाशाली युवती ने किराए की राइफल से शूटिंग गेम की प्रैक्टिस शुरू की। एक बार ऐसा भी हुआ कि जब मैच से तुरंत पहले उसे किराये की राइफल भी नसीब नहीं हो पाई। मजबूरी के चलते उसे किसी अन्य खिलाड़ी की राइफल मांगकर मैच खेलना पड़ा। नतीजा, काजल वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई, जिसकी वह खुद उम्मीद कर रही थी। पिता की हैसियत नहीं थी कि वह उसे लाखों रुपये की राइफल खरीद कर दे सकें। हालांकि उन्होंने हर कदम पर अपनी हैसियत से बढ़कर काजल की कोशिश की।
विजय सैनी ने बताया कि तुगलकाबाद में प्रैक्टिस करने के बाद काजल के खेल में धीरे-धीरे सुधार आता गया और उन्होंने साल 2017 व 2018 में केरला में हुई नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में चौर गोल्ड समेत नौ मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनावाया। चूंकि किराये की राइफल के बार-बार बदलने से काजल को खेलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, इसलिए साल 2017 में उन्होंने अपने रिश्तेदारों से पैसे उधार मांगकर काजल के लिए एक नई राइफल खरीदी, ताकि वह बिना किसी दिक्कत के अपनी प्रैक्टिस कर सकें।
उन्होंने बताया कि इसी नई राइफल से काजल ने जयपुर में हुई ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता। इस प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन मलेशिया में हुए वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स के लिए हुआ, जहां मामूली अंतर से वह पदक जीतने से चूक गईं।
इस प्रतिभावान खिलाड़ी ने बताया शूटिंग गेम में उनका पदार्पण चार साल पूर्व संयोग से उस समय हुआ, जब वह बीएससी द्वितीय वर्ष के दौरान एनसीसी की कैडेट थीं। एनसीसी कैंप में शूटिंग की एक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें उसने पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद मेरी प्रतिभा को देखते हुए एनसीसी कैंप इंचार्ज ने मेरे पिता को मुझे शूटिंग गेम में करियर बनाने की सलाह दी। उसके बाद से ही मैंने शूटिंग को अपने जीवन में आत्मसात कर लिया।
मेरे लिए इस गेम में आगे बढ़ना आसान नहीं था, क्योंकि मेरे परिवार के किसी भी सदस्य ने न तो इस गेम को कभी खेला है और न ही इस गेम के बारे में कोई जानकारी थी। बावजूद इसके, न मेरे परिजनों और न ही मैंने कभी हौंसला हारा और तमाम मुश्किलों के बावजूद अपने आगे बढ़ती रही। एशियन मेडल जीतने के बाद अब उनका लक्ष्य वर्ल्ड कप व ओलंपिक में मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करना है।