उन्होंने कहा कि आम तौर पर प्रतिबंधित पदार्थ सही तरह के गहन प्रशिक्षण के साथ मिलकर काम करते हैं। कई ऐथलीट इस समय उचित प्रशिक्षण सुविधाओं का उपयोग नहीं कर सकते हैं और इसलिए उन पदार्थों को लेने से उन्हें बहुत मदद नहीं मिलेगी।
फिट्जगेराल्ड ने हालांकि कहा कि डोपिंग रोधी संगठनों और खिलाड़ियों को अपनी जिम्मेदारियों का अहसास है और कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए वाडा सुनिश्चित कर रहा है कि दुनिया में डोपिंग रोधी परीक्षण की अहमियत बनी रहे।
उन्होंने कहा कि वाडा वैश्विक डोपिंग रोधी नियामक है, परीक्षण प्राधिकरण नहीं। डोपिंग रोधी संगठनों (एडीओ) और खिलाड़ियों को अपनी जिम्मेदारियां पता है। हमने हाल में एडीओ और खिलाड़ियों को अपडेट दिशानिर्देश भेजे थे जिससे कि उन्हें पता रहे कि इस समय क्या चल रहा है। हमारी वेबसाइट पर भी ये दिशानिर्देश उपलब्ध हैं।
इससे पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) और विश्व रग्बी में भी मीडिया के जुड़े मामलों के प्रमुख रहे फिट्जगेराल्ड ने कहा, 'इस बीच वाडा निगरानी कर रहा है कि इस महामारी के प्रकोप के बीच दुनिया भर में डोपिंग रोधी परीक्षणों अहमियत बनी रहे। यह एक लगातार बदलती स्थिति है और वाडा इसमें हो रहे बदलाव के साथ सामंजस्य बैठा रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण यह सुनिश्चित करना है कि इस महामारी के बाद जितना जल्दी संभव हो सारी प्रणाली फिर से पहले की तरह मजबूत हो जाए और व्यवस्था से जुड़े संभावित कमजोर बिंदुओं को एक बार फिर मजबूत किया जाए।