ओडिशा माइनिंग कॉरपोरेशन में कार्यरत इस एथलीट ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण देश प्रदेश ही नहीं, दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। अब मूलभूत सुविधाओं पर पूरा फोकस है और ऐसे में आगे प्रायोजन मिलेगा या नहीं, कुछ कह नहीं सकते। उन्होंने कहा कि मैंने जर्मनी में तीन महीने अभ्यास के लिए हवाई टिकट बुक करा ली थी जिसका पैसा वापिस नहीं मिला।
इसके अलावा वहां 20 लाख रुपये अग्रिम दे दिया था जो अभी तक वापस नहीं मिला। दुती ने यह भी कहा कि अभ्यास रूकने से उनकी लय भी टूट गई है और अब उन्हें रफ्तार पकड़ने में छह महीने लगेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा अभ्यास शेड्यूल ऐसा था कि अक्तूबर से धीरे धीरे रफ्तार पकड़ते हैं और मार्च से कड़ा अभ्यास शुरू होता है, जबकि अप्रैल में पूरी रफ्तार पकड़ लेते हैं। मैने मार्च से जून तक जर्मनी में अभ्यास के बाद सीधे टोक्यो जाने की सोची थी, लेकिन सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया।
उन्होंने कहा कि अगले साल ओलंपिक होंगे या नहीं , इसे लेकर भी संशय की स्थिति है। दुती ने कहा कि अभी तक कोरोना महामारी का प्रभाव कम नहीं हुआ है और ना ही इसकी कोई वैक्सीन बनी है। मुझे नहीं लगता कि वैक्सीन आने तक कोई खेल होगा। विदेश जाने का तो सवाल ही नहीं होता और भारत में एथलेटिक्स के अभ्यास के लिए उतनी सुविधायें नहीं हैं और ना ही कोई बड़ा टूर्नामेंट होना है।
उन्होंने कहा कि ओलंपिक क्वालीफिकेशन के लिए विदेशों में तैयारी बहुत जरूरी है। दुती ने कहा कि जितने भी भारतीय एथलीटों ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया है विदेशों में तैयारी के दम पर ही किया है चाहे वह नीरज चोपड़ा (भालाफेंक) हो या 400 रिले टीम।