भारतीय एथलीटों के आवास के पास से सिरिंज मिलने के आरोप का मामला अब कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन के कोर्ट तक जा पहुंचा है। इसे नो-नीडल पॉलिसी (गैर-सुई नीति) का उल्लंघन माना गया है।
सीजीएफ ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा, 'सीजीएफ मेडिकल आयोग ने सीजीएफ की गैर सुई नीति के कथित उल्लंघन में अपनी जांच का निष्कर्ष निकाला है। इसका निष्कर्ष सीजीएफ के फेडरेशन कोर्ट में बढ़ा दिए गए हैं जो इस मामले में सुनवाई करेगा। सुनवाई मंगलवार सुबह 10 बजे होगी और इसके बाद ही फैसला सुनाया जाएगा।' सुनवाई के बाद किसी भी संभावित प्रतिबंधों का निर्णय लिया जाएगा।
गेम्स चीफ डेविड ग्रेवेम्बर्ग ने पत्रकारों से कहा, 'गैर सुई नीति के स्पष्ट उल्लंघन हुआ है और हमारी जांच के हिस्से के तहत एक सीजीए (कॉमनवेल्थ गेम्स एसोसिएशन) को चिकित्सा आयोग से मिलने के लिए बुलाया गया है। इन सुइयों को यहां लाया गया है जबकि उन्हें वहां रहने की कोई मंजूरी नहीं है।'
इस मामले को डोपिंग विरोधी नियम उल्लंघन के रूप में परिभाषित नहीं किया गया है, बल्कि सीजीएफ की नो-सुई नीति के उल्लंघन के रूप में पाया गया, जिसे मेजर इवेंट्स में परिचित कराया गया है।
स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, असलियत में जो हुआ है उस पर विवादित विवरण हुआ है, सीजीएफ ने घटना की असलियत का खुलासा नहीं किया है जब तक संघ महासंघ की प्रक्रिया समाप्त नहीं हो जाती।
नो नीडल नियम में बताया गया है कि इसका इस्तेमाल चिकित्सकीय योग्य चिकित्सकों द्वारा चोट, बीमारी या अन्य चिकित्सा स्थितियों के उचित इलाज के लिए किया जा सकता है।