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Commonwealth Games 2018: सैयद-प्रकाश ने दिखाए थे जलवे, क्या भारत दोहरा पाएगा स्वर्णिम इतिहास?

Fri, 30 Mar 2018 02:56 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2018
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21वें कॉमनवेल्थ गेम्स का आगाज 4 अप्रैल से गोल्ड कोस्ट (ऑस्ट्रेलिया) में होने जा रहा है। ऐसे में भारतीय एथलीटों से देश को बड़ी उम्मीदें हैं। आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स में देश की स्टार बैडमिंटन  खिलाड़ी पीवी सिंधू और साइना नेहवाल भी मोर्चा संभालने की तैयारी में जुटी हुई हैं। पीवी सिंधू के पिछले शानदार प्रदर्शन को देखते हुए इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) ने ओपनिंग सेरेमनी में झंडा लेकर देश का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी भी उन्हें ही सौंपी है।

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बता दें कि अब तक आयोजित हुए सभी 20 कॉमनवेल्थ गेम्स में से भारत ने सिर्फ 16  में हिस्सा लिया।  लेकिन इन कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का सफर स्वर्णिम है। हालांकि कॉमनवेल्थ में भारत को सबसे बड़ी उपलब्धि साल 2010 में मिली। इस साल कॉमनवेल्थ गेम्स का मेजबान भारत ही था और यह दिल्ली में आयोजित किया गया था।  इस साल भारत ने कुल 101 पदक जीतकर अंक तालिका में दूसरे स्थान पर कब्जा किया था। भारत के खाते में 38 गोल्ड के साथ 27 सिल्वर और 36 ब्रॉन्ज मेडल आए थे।

भारत का कॉमनवेल्थ गेम्स में इतिहास स्वर्णिम रहा है और इसका श्रेय काफी हद तक पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण और सैयद मोदी को जाता है। प्रकाश पादुकोण ने 1978 (एडमॉन्टन) में खेले गए कॉमनवेल्थ गेम्स की पुरुष एकल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। वहीं सैयद मोदी ने यही कारनामा साल 1982 में ऑस्ट्रेलिया में हुए कॉमनवेल्थ में दोहराया था। अब जब कॉमनवेल्थ गेम्स को महज पांच दिन शेष रह गए हैं तो सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार भी हम अपना इतिहास दोहरा पाएंगे। 
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आइए देखते 1982 में ब्रिस्बेन में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में क्या थी भारत की स्थिति

ब्रिस्बेन में हुए गेम्स में बैडमिंटन और कुश्ती के दम पर भारत ने तालिका में अपना छठा स्थान कायम रखा था। इससे पहले शटलर प्रकाश पादुकोण ने स्वर्णिम सफलता हासिल की थी तो वहीं  सैयद मोदी ने चमत्कारिक प्रदर्शन करते हुए एकल स्पर्धा में सोना जीता था। हालांकि युगल स्पर्धा में भारतीयों की झोली खाली रही थी। 

इसके अलावा कुश्ती में रामचंद्र सारंग, महावीर सिंह, जगमिंदर सिंह और राजिंदर सिंह ने स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगे की शान बढ़ाई थी। हालांकि एथलेटिक्स में कोई भी खिलाड़ी पदक नहीं जीत पाए थे। पहली बार निशानेबाजों ने भी एक रजत और कांस्य सहित दो पदक जीते थे। 

पहली बार तीरंदाजी 
इन खेलों में पहली बार तीरंदाजी को शामिल किया गया था। पुरुषों की तीरंदाजी स्पर्धा का पहला स्वर्ण पदक इंग्लैंड के मार्क ब्लेनकर्ने और महिलाओं का मेडल न्यूजीलैंड की नेरोली के खाते में गया था। 

भारत की उपलब्धि
कॉमनवेल्थ गेम्स (1982) में भारत ने कुल 16 पदक जीते थे, जिसमें 5 स्वर्ण समेत 8 रजत और 3 कांस्य पदक शामिल थे। इन 16 पदकों के साथ भारत अंक तालिका में छठे स्थान पर रहा था। इन गेम्स में कुल 46 देशों ने हिस्सा लिया था, जिसमें से चार देशों ने पहली बार ही कॉमनवेल्थ गेम्स में हाथ आजमाया था। बता दें कि इस गेम्स में कुल 1583 खिलाड़ियों ने 12 खेलों और 141 स्पर्धाओं में हिस्सा लिया था।

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