टोक्यो ओलंपिक की तैयारियों के लिए देश के टॉप शूटर अपनी मनमर्जी से विदेश में तैयारियां नहीं कर पाएंगे। रियो ओलंपिक से पहले और उसके बाद खेल मंत्रालय की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) के जरिए पैसा जारी करवाकर विदेश में अकेले तैयारियां करने के दौरान सामने आए विवादों को ध्यान में रख एनआरएआई ने यह फैसला लिया है।
टॉप्स में शामिल 22 शूटरों को एनआरएआई ने फरमान जारी किया है कि अब वे निजी कोच और खुद से तैयार कार्यक्रम पर विदेश में तैयारियां नहीं कर पाएंगे। उनकी ओर से जो भी तैयारियों का कार्यक्रम बनाया जाएगा उसे नेशनल और विदेशी कोच के समक्ष रखा जाएगा। इनकी मंजूरी मिलने पर ही दौरे को हरी झंडी मिलेगी।
फेडरेशन का तर्क है कि टॉप्स से पैसा मिलने के चलते के शूटरों ने मनमाने ढंग से विदेश में ट्रेनिंग कार्यक्रम तैयार किए जिसका मुख्य आयोजन में खराब प्रदर्शन का खामियाजा भुगतना पड़ा। यहां तक फेडरेशन और नेशनल कोच को पिछले कई मौकों पर शूटरों के विदेश में तैयारियां करने की जानकारी नहीं थी, जबकि फेडरेशन ने शूटरों की तैयारियों का कार्यक्रम कहीं और बना रखा था।
फेडरेशन ने इसे साफ तौर पर टॉप्स के पैसे के दुरुपयोग माना है। फेडरेशन का कहना है कि अब टॉप्स के पैसे के जरिए शूटर जो भी तैयारियों का कार्यक्रम बनाएगा उसे नेशनल, विदेशी और निजी कोच बैठकर देखेंगे। तीनों की सहमति होगी तभी शूटर के कार्यक्रम को मंजूरी मिलेगी। इससे फेडरेशन को शूटर के कार्यक्रम की जानकारी होगी। उसी अनुसार बाकी के शूटरों का कैंप लगाया जाएगा।
काफी गड़बड़ियां आ चुकी हैं सामने
रियो ओलंपिक के बाद अभिनव बिंद्रा की अगुवाई में गठित रीव्यू कमेटी की रिपोर्ट में टॉप्स के पैसे को लेकर कई गड़बड़ियां सामने आई थीं। इनमें सबसे बड़ा मामला रियो खेलने गईं 10 मीटर एयरराइफल की शूटर आयोनिका पॉल का था। वह कैंप में सुमा शिरूर के संरक्षण में ट्रेनिंग कर रही थीं, लेकिन टॉप्स के पैसे से वह बाद में नामी कोच थामस फारनिक के साथ विदेश में ट्रेनिंग करने चली गईं, लेकिन रियो वह बतौर मेंटर सुमा को लेकर गईं, नतीजा यह निकला कि आयोनिका का ओलंपिक में प्रदर्शन बेहद खराब रहा। इसी तरह रियो से पहले सेना के शूटर अलग तैयारियां कर रहे थे जबकि नेशनल कैंप लगा हुआ था।
सौरव, मनु, मेहुली जैसे युवा शूटर हैं टॉप्स में
टॉप्स में मनु भाकर, सौरव चौधरी, मेहुली घोष, अनीष भानवाला, लक्ष्य श्योराण, अंगदवीर सिंह बाजवा, एलावेनिल वालारिवान, 13 साल की ईशा सिंह जैसे शूटर हैं। युवा शूटरों को ध्यान में रख फेडरेशन ने यह फरमान जारी किया है। जिससे नेशनल, विदेशी और निजी कोच के साथ शूटर के बीच समन्वय की स्थिति बनेगी।