बरोद विधानसभा सीट से बीजेपी की टिकट पर अपनी किस्मत आजमा रहे ओलंपिक मेडलिस्ट योगेश्वर दत्त को हार का सामना करना पड़ा। पहलवानी के दंगल में बड़ों-बड़ों को चित करने वाले योगेश्वर दत्त राजनीति के दंगल में हार गए। सोनीपत के गोहाना तहसील के भैंसवाल कलां के रहने वाले योगेश्वर का मुकाबला कांग्रेस की परंपरागत सीट पर आसान नहीं था। इस सीट में पिछले दो चुनावों में लगातार कांग्रेस ने जीत दर्ज की। कांग्रेस के श्रीकृष्ण हुड्डा के सामने शुरुआती रुझानों में योगेश्वर दत्त आगे चल रहे थे, लेकिन जैस-जैसे राउंड बढ़ते गए वो कांग्रेस प्रत्याशी से पिछड़ते गए। आखिरकार कांग्रेस के गढ़ में श्री कृष्णा हुडा को कुल 50530 वोट मिले जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी इंडियन नेशनल लोक दल के कपूर सिंह नरवाल को 45347 वोट प्राप्त हुए थे। वहीं योगेश्वर दत्त को 16729 वोट मिले। 2014 के कॉमनवेल्थ खेलों में गोल्ड मेडल विजेता और 2013 में पद्मश्री से सम्मानित योगेश्वर दत्त डीएसपी के पद से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामा था, लेकिन राजनीति के इस दंगल में उन्हें सफलता हासिल नहीं हो सकी।
बबीता फोगाट और संदीप सिंह
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भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान संदीप सिंह बीजेपी की टिकट पर विधानसभा पहुंच गए। कुरुक्षेत्र जिले की पेहोवा सीट पर उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वि कांग्रेस के मनदीप सिंह चट्टा को 5314 वोटों से मात दी।
संदीप सिंह को उनके शानदार फ्लिक के लिए फिल्कर सिंह के नाम से जाता है। संदीप सिंह को 42 हजार 613 वोट मिले। दूसरे नंबर पर रहे मनदीप सिंह चट्टा को 37 हजार 299 वोट से संतोष करना पड़ा। इस सीट से कुल 11 उम्मीदवार चुनावी दंगल में कूदे थे।
संदीप सिंह को उनके शानदार खेल के लिए 2010 में अर्जुन अवॉर्ड से नवाजा गया था। वह 2004 से 2012 तक भारत की हॉकी टीम का हिस्सा रहे हैं। वह 2009 में भारत की हॉकी टीम के कप्तान बनाए गए थे। पूर्व भारतीय कप्तान भी हरियाणा पुलिस में डीएसपी रैंक के अधिकारी थे। नौकरी से इस्तीफा देकर उन्होंने बीजेपी का दामन थामा था।
2014 और 2018 कॉमनवेल्थ खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाली बबीता दादरी से चुनावी दंगल में कूदीं थीं, लेकिन उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार सोमबीर से हार का सामना करना पड़ा है। इस सीट पर बबीता तीसरे स्थान पर रहीं। निर्दलीय उम्मीदवार सोमबीर को 43 हजार 849 मत मिले। सतपाल सांगवान को 29 हजार 577 वोट मिले तो बबीता फोगाट को 24 हजार 786 वोट से संतोष करना पड़ा।
नैना चौटाला, पत्नी अजय चौटाला (फाइल फोटो)
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कांग्रेस उम्मीदवार और पूर्व बीसीसीबाई प्रमुख रणबीर सिंह महेंद्र को भी हार का सामना करना पड़ा। बाढ़डा विधानसभा सीट पर इस बार देवीलाल और बंसीलाल के परिवार से प्रत्याशी आमने-सामने थे। जजपा ने जहां नैना चौटाला को बाढ़डा से मैदान में उतारा था तो वहीं कांग्रेस ने बंसीलाल के बेटे एवं बीसीसीआई के पूर्व चेयरमैन रणबीर सिंह महेंद्रा पर दांव खेला था।
इस सीट से नैना चौटाला ने शानदार जीत दर्ज की। नैना चौटाला डॉ. अजय चौटाला की पत्नी हैं और जेजेपी सुप्रीमो दुष्यंत चौटाला की मां हैं। नैना चौटाला 2014 में डबवाली से इनेलो की सीट पर चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बनी थी।
पारिवारिक कलह के बाद नई पार्टी जजपा का गठन हुआ तो नैना चौटाला को डबवाली सीट की बजाए बाढड़ा सीट से चुनाव लड़ाया गया। नैना चौटाला ने कांग्रेस के रणबीर सिंह महेंद्रा को 13704 वोट से हराया।