फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कौन हैं गुरिंदरवीर सिंह?: 100 मीटर स्प्रिंट में 10.09 सेकंड का समय निकालकर तोड़ा रिकॉर्ड; लगा बधाइयों का तांता

Sun, 24 May 2026 12:16 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

पंजाब के धावक गुरिंदरवीर सिंह ने 2026 एथलेटिक्स फेडरेशन कप में 100 मीटर दौड़ 10.09 सेकंड में पूरी कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक जीता। वह 10.10 सेकंड से कम समय में 100 मीटर दौड़ पूरी करने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। उनकी इस उपलब्धि पर परिवार, कोच और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गर्व जताया है।
विज्ञापन
गुरिंदरवीर सिंह - फोटो : Twitter
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पंजाब के उभरते हुए धावक गुरिंदरवीर सिंह ने भारतीय एथलेटिक्स में नया इतिहास रच दिया है। रांची में आयोजित 2026 एथलेटिक्स फेडरेशन कप में गुरिंदरवीर ने पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतते हुए 10.09 सेकंड का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। इसके साथ ही वह 100 मीटर दौड़ में 10.10 सेकंड से कम समय निकालने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद पंजाब से लेकर पूरे देश में खुशी की लहर है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई दी और इसे पंजाब के लिए गर्व का क्षण बताया।
विज्ञापन

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दी बधाई
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ट्वीट करते हुए कहा, 'हमारे होनहार खिलाड़ी गुरिंदरवीर सिंह को रांची में फेडरेशन कप की 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतने पर हार्दिक बधाई। हमारे बहादुर नौजवान ने 10.09 सेकंड का समय निकालकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया है। गुरिंदरवीर इतने कम समय में रेस पूरी करने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। पंजाब के बेटे ने लगातार दो दिनों में दूसरा राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़कर राज्य का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।'
 

परिवार को बेटे पर गर्व
गुरिंदरवीर की मां रूपिंदर कौर ने बेटे की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा, 'हमें बहुत गर्व और खुशी महसूस हो रही है कि हमारे बेटे ने इतिहास रच दिया। रिश्तेदार लगातार फोन करके बधाई दे रहे हैं। बचपन से ही वह बहुत खुशमिजाज था। उसके कोचों ने भी काफी मेहनत की। उसके पिता का सपना था कि वह एथलीट बने। मैं युवाओं से कहना चाहती हूं कि माता-पिता की बात सुनें, पढ़ाई और खेल दोनों पर ध्यान दें और नशे से दूर रहें।' वहीं उनके पिता कमलजीत सिंह ने कहा, 'वह 12 साल की उम्र से मेहनत कर रहा है। मैं खुद वॉलीबॉल खेलता था और चाहता था कि वह खिलाड़ी बने। खेल ही ऐसा मंच है जहां आप अपना नाम बनाते हैं और माता-पिता व कोच को गर्व महसूस कराते हैं।'
 
 

कोच ने बताया मेहनत का सफर
गुरिंदरवीर के कोच सरबजीत सिंह ने कहा कि खिलाड़ी ने पिछले 10 वर्षों तक उनके साथ कड़ी मेहनत की। उन्होंने कहा, 'मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। गुरिंदरवीर ने मेरे साथ 10 साल तक ट्रेनिंग की। जैसे ही उसने सेमीफाइनल में अनीमेष का रिकॉर्ड तोड़ा, उसका आत्मविश्वास और बढ़ गया। उसने ऐतिहासिक रेस दौड़कर पंजाब का नाम पूरी दुनिया में रोशन कर दिया।'
 

मानसिक मजबूती बनी सफलता की कुंजी
गुरिंदरवीर सिंह ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, कोच और सपोर्ट स्टाफ को दिया। उन्होंने कहा, 'यह बहुत शानदार एहसास है। मैं आगे भी कड़ी ट्रेनिंग करके अच्छे नतीजे लाना चाहता हूं। आखिरी समय में खेल शारीरिक से ज्यादा मानसिक मजबूती का होता है। मैं खुद को मानसिक रूप से मजबूत रख पाया और इसी वजह से अच्छा प्रदर्शन कर सका।' उन्होंने आगे कहा, 'मैं अपने परिवार, कोच, डाइटिशियन और रिलायंस फाउंडेशन को श्रेय देना चाहता हूं। सभी ने मुझ पर भरोसा किया और मुझे बेहतरीन सुविधाएं दीं।'
विज्ञापन

कॉमनवेल्थ गेम्स पर नजर
गुरिंदरवीर ने कहा कि अब उनका पूरा ध्यान ट्रेनिंग पर रहेगा और वह भविष्य में कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करना चाहते हैं। उन्होंने साथी धावक अनीमेष कुजूर और मणिकांत का जिक्र करते हुए कहा कि मजबूत प्रतिस्पर्धा खिलाड़ियों को बेहतर बनने के लिए प्रेरित करती है।
 
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें