फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

37 साल तक मेरा रिकॉर्ड नहीं टूटना दुर्भाग्यपूर्ण: सैनी

Tue, 22 Oct 2019 07:00 AM IST
मुकेश कुमार झा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
विज्ञापन
अविनाश साबले - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

खिलाड़ी के नाम पर कीर्तिमान रहने से बड़ा गौरव और कोई नहीं हो सकता। फिर कीर्तिमान साढ़े तीन दशक तक कायम रहे तो कहने ही क्या, लेकिन अर्जुन अवार्डी गोपाल सैनी इसे खुद और देश का दुर्भाग्य मानते हैं। राजस्थान के सैनी का 3000 मीटर स्टीपलचेज में 37 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड पिछले साल अविनाश साबले ने तोड़ा।

विज्ञापन


इससे सैनी के सिर से मानों कोई बहुत बड़ा बोझ हट गया हो। वह कहते हैं ऐसा कोई दिन नहीं होता था जब वह यह सोचते थे कि उनका रिकॉर्ड कब टूटेगा। इसे काफी पहले टूट जाना चाहिए था। विदेशी में तो रिकॉर्ड बनते ही कुछ दिनों में टूट जाते हैं। साबले को आर्शीवाद देते हुए कहते हैं कि वह जल्द खुद को दुनिया के शीर्ष एथलीटों में शुमार करें। हाल ही में दोहा विश्व चैंपियनशिप में 3000 मीटर स्टीपलचेज में दो बार राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने वाले साबले ने बीते वर्ष 8.29.80 मिनट के साथ सैनी (8:30.88 मिनट) का कीर्तिमान ध्वस्त किया था जो उन्होंने 1981 टोक्यो एशियाई चैंपियनशिप में बनाया था।

सैनी ने अमर उजाला से कहा कि उस दिन भारतीय टीम के चीफ कोच बहादुर सिंह और पूर्व चीफ कोच जेएस सैनी ने फोन पर कहा कि तेरा रिकॉर्ड टूट गया है। उस वक्त उन्हें साबले के बारे में बिल्कुल नहीं मालूम था पर उन्होंने फैसला लिया था कि उसे मिलकर बधाई देंगे। पंद्रह दिन पहले वह साबले के शहर नागपुर गए थे पर उनकी मुलाकात नहीं हुई।
विज्ञापन


ओलंपिक में नंगे पांव दौड़े सैनी : सैनी वह एथलीट हैं जो मास्को ओलंपिक में भी नंगे पांव दौड़े। टोक्यो एशियाई चैंपियनशिप में 5000 मीटर का स्वर्ण और 3000 मीटर स्टीपलचेज का रजत भी उन्होंने नंगे पैरों से जीता। वह दुनिया के एकमात्र एथलीट होंगे जिन्होंने ताउम्र इतने सारे टूर्नामेंटों में नंगे पैर दौड़े। भारी जूते होने के कारण उन्होंने कभी इन्हें नहीं पहना, लेकिन अब तो स्पाइक्स आ गए हैं। अब नंगे पैर दौड़ने का नियम ही नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें