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37 साल पुराना 3000 मीटर स्टीपलचेज का अपना रिकॉर्ड टूटने से खुश हुए गोपाल, अविनाश साबले को दी बधाई

Mon, 21 Oct 2019 07:43 AM IST
Rajeev Rai हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला
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अविनाश साबले - फोटो : social media
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खिलाड़ी के नाम पर कीर्तिमान रहने से बड़ा गौरव और कोई नहीं हो सकता। फिर कीर्तिमान साढ़े तीन दशक तक कायम रहे तो कहने ही क्या, लेकिन अर्जुन अवार्डी गोपाल सैनी इसे खुद और देश का दुर्भाग्य मानते हैं। राजस्थान के गोपाल सैनी वही एथलीट हैं जिनका 3000 मीटर स्टीपलचेज में 37 साल पुराना राष्ट्रीय कीर्तिमान अविनाश साबले ने भंग किया। सैनी के सिर से मानों कोई बहुत बड़ा बोझ हट गया हो। उनके मुंह से यही निकलता है ऐसा कोई दिन नहीं होता था जब वह यह सोचते थे कि उनका यह कीर्तिमान कब टूटेगा। अब वह राहत महसूस कर रहे हैं और अविनाश को आर्शीवाद देते हुए कहते हैं कि यह एथलीट जल्द अपने को दुनिया के टॉप एथलीटों में शुमार करे।

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चीफ कोच ने फोन पर बताया टूट गया तेरा रिकार्ड

अविनेश साबले - फोटो : social media
इसी माह दोहा विश्व चैंपियनशिप में 3000 मीटर स्टीपलचेज में दो बार राष्ट्रीय कीर्तिमान रचने वाले अविनाश ने बीते वर्ष 8.29.80 मिनट के साथ गोपाल सैनी की ओर से 1981 की टोक्यो एशियाई चैंपियनशिप में रचा गया 8.30.88 मिनट का राष्ट्रीय कीर्तिमान तोड़ा था।

गोपाल 'अमर उजाला' से खुलासा करते हैं कि उस दिन अचानक उन्हें भारतीय टीम के चीफ कोच बहादुर सिंह और पूर्व चीफ कोच जेएस सैनी का फोन आया। दोनों ने कहा कि तेरा रिकार्ड टूट गया है। उस वक्त उन्हें अविनाश के बारे में बिल्कुल नहीं मालूम था। लेकिन उस दौरान उन्होंने फैसला लिया था कि उसे मिलकर बधाई देंगे। 15 दिन पहले वह अविनाश के शहर नागपुर गए थे। उन्हें उम्मीद थी कि वह उन्हें वहां मिलेगा, लेकिन वह कहीं गए हुए थे। उन्होंने नागपुर में कहा था कि इतने दिनों तक उनका रिकार्ड कायम रहना देश के लिए दुर्भाग्य की बात है। इसे काफी पहले टूट जाना चाहिए था। रिकार्ड नहीं टूटता तो यह दुख की बात होती। विदेशों में तो रिकार्ड बनते ही कुछ दिनों में टूट जाते हैं। उन्होंने अविनाश को यही आर्शीवाद दिया है कि वह सुस्त नहीं पड़ें और अच्छा करें। अपना समय 8.10 मिनट के आसपास लेकर आएं।
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ओलंपिक में भी नंगे पांव दौड़े गोपाल

गोपाल सैनी वह एथलीट हैं जो मास्को ओलंपिक में भी नंगे पांव दौड़े। 1981 की टोक्यो एशियाई चैंपियनशिप में 5000 मीटर का स्वर्ण और 3000 मीटर स्टीपलचेज का रजत भी उन्होंने नंगे पैरों से जीता। गोपाल के मुताबिक वह दुनिया एक इकलौते एथलीटों होंगे जिन्होंने ताउम्र इतने सारे टूर्नामेंट नंगे पैर दौड़े। भारी जूते होने के कारण उन्होंने कभी इन्हें नहीं पहना, लेकिन अब तो स्पाइक्स आ गए हैं। अब नंगे पैर दौडने का नियम ही नहीं है।
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