पहलवान गीता और बबीता का रियो ओलंपिक में खेलने का सपना खत्म हो गया है। भारतीय कुश्ती संघ ने इस खेल की अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनियन वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) की नाराजगी के बाद दोनों पहलवान बहनों को इस्तांबुल (तुर्की) में छह से आठ मई को होने वाले अंतिम ओलंपिक क्वालीफायर के लिए भारतीय टीम में शामिल नहीं किया है।
कुश्ती संघ ने यूडब्ल्यूडब्ल्यू की कार्रवाई से बचने के लिए यह भी फैसला लिया है कि अगर इन दोनों पहलवानों के भार वर्ग 53 और 58 किलो में भारत रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई भी करता है तब भी इन दोनों ओलंपिक टीम के चयन होने वाले ट्रायल में नहीं खेलने दिया जाएगा।
हाल ही में उलानबटोर (मंगोलिया) में हुए दूसरे ओलंपिक क्वालीफायर में इन दोनों पहलवानों ने हार के बाद कांस्य पदक के लिए होने वाले रेपीचेज मुकाबलों में खेलने से इंकार कर दिया था।
कांस्य जीतने की स्थिति में भी दोनों को रियो का टिकट नहीं मिलना था। इसलिए दोनों ने नहीं खेलने का फैसला लिया। कुश्ती संघ के एक पदाधिकारी के मुताबिक मौके पर मौजूद यूडब्लूडब्लू के अध्यक्ष नेनाद लालोविक को जब इस बात का पता लगा तो उन्होंने अगले ओलंपिक क्वालीफायर के लिए भारत के 53 और 58 किलो वजनों को बाहर करने का फैसला ले लिया।
कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह ने लालोविक को मनाया। लालोविक ने साफ कर दिया कि वह कार्रवाई इस सूरत में नहीं करेंगे जब इन दोनों पहलवानों को इंस्तांबुल के लिए टीम में शामिल नहीं किया जाएगा। कुश्ती संघ ने यही किया।
53 किलो में बबीता की जगह ललिता को और 58 किलो में गीता की जगह साक्षी मलिक को शामिल किया गया है। गीता और बबीता को सोफिया (बुल्गारिया) में चल रहे कैंप से भी बुला लिया गया है। गीता वापस आ रही हैं, लेकिन बबीता ने वहीं रुकने की प्रार्थना की है, जिसे मंजूर कर लिया गया है।