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WFI Elections: भारतीय कुश्ती संघ के चुनाव पर गुवाहाटी हाईकोर्ट की रोक, 11 जुलाई को होने थे इलेक्शन्स

Sun, 25 Jun 2023 11:25 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी

सार

भारत के शीर्ष पहलवानों ने काफी दिनों तक कुश्ती संघ के चुनाव के लिए और अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों को हटाने के खिलाफ लगातार प्रदर्शन किया। पहलवानों ने बृजभूषण शरण सहित टीम के कुछ कोच पर यौन शोषण का आरोप लगाए थे।
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पहलवानों का प्रदर्शन और बृजभूषण शरण सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारतीय कुश्ती संघ के चुनाव पर गुवाहाटी हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। पहले यह चुनाव 11 जुलाई को होने थे, लेकिन अब इस पर रोक लगा दी गई है। असम कुश्ती संघ की मांग पर यह रोक लगाई गई है। बुधवार (21 जून) को भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की तदर्थ समिति ने भारतीय कुश्ती संघ के चुनावों को पांच दिनों के लिए आगे बढ़ा दिया था। पहले यह चुनाव छह जुलाई को होने थे, जिसे तदर्थ समिति ने बदलकर 11 जुलाई कर दिया था, लेकिन अब 11 जुलाई को भी यह चुनाव नहीं होंगे।
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हाईकोर्ट ने क्यों चुनावों पर रोक लगाई?
दरअसल, असम कुश्ती संघ ने WFI, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की तदर्थ समिति और खेल मंत्रालय के खिलाफ दायर याचिका में कहा कि वे डब्ल्यूएफआई से सदस्य के रूप में मान्यता के हकदार हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के गोंडा में 15 नवंबर 2014 को डब्ल्यूएफआई की आम परिषद को तत्कालीन कार्यकारी समिति की सिफारिश के बावजूद ऐसा नहीं किया गया।

तदर्थ समिति ने मतदाता सूची के लिए नाम भेजने की आखिरी तारीख 25 जून तय की है, जबकि नई संचालन संस्था के चयन के लिए चुनाव 11 जुलाई को होने हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि जब तक कि उनकी संस्था को डब्ल्यूएफआई से मान्यता नहीं मिलती और वे मतदाता सूची के लिए अपने प्रतिनिधि को नामांकित नहीं कर पाते तब तक चुनाव प्रक्रिया को रोका जाना चाहिए।
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अदालत ने प्रतिवादियों डब्ल्यूएफआई की तदर्थ समिति और खेल मंत्रालय को निर्देश दिया कि सुनवाई की अगली तारीख तक वे डब्ल्यूएफआई की कार्यकारी समिति के चुनाव की प्रक्रिया पर आगे नहीं बढ़ें। सुनवाई की अगली तारीख 17 जुलाई तय की गई है।

11 जुलाई तक क्यों टाले गए थे चुनाव

इससे पहले पांच असंबद्ध राज्य निकायों ने चुनावों के लिए मतदान के अधिकार की मांग करते हुए सुनवाई में अपना मामला पेश किया था। इस कारण तदर्थ समिति को यह फैसला करना पड़ा था। बुधवार को तीन सदस्यीय समिति से महाराष्ट्र, हरियाणा, तेलंगाना, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में असंबद्ध राज्य निकायों द्वारा संपर्क किया गया था। इस समिति में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एमएम कुमार शामिल हैं। समिति ने इन इकाइयों को सुनवाई के लिए बुलाया था।

समाचार एजेंसी पीटीआई से एक सूत्र ने कहा, "राज्य इकाइयों ने अपना मामला पेश किया, जबकि भारतीय कुश्ती संघ (डब्ल्यूएफआई) के प्रतिनिधियों ने इन निकायों की संबद्धता रद्द करने के अपने फैसले का बचाव किया। पैनल को निर्णय लेने और आदेश तैयार करने के लिए समय चाहिए, इसलिए चुनाव 11 जुलाई तक के लिए टाल दिए गए थे।"

बाएं से- साक्षी मलिक, बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट, संगीता फोगाट और सत्यव्रत कादियान - फोटो : सोशल मीडिया
शीर्ष पहलवानों ने किया था प्रदर्शन
भारत के शीर्ष पहलवानों ने काफी दिनों तक कुश्ती संघ के चुनाव के लिए और अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों को हटाने के खिलाफ लगातार प्रदर्शन किया। पहलवानों ने बृजभूषण शरण सहित टीम के कुछ कोच पर यौन शोषण का आरोप लगाए थे।

18 जनवरी को पहली बार धरने पर बैठे थे पहलवान
देश के शीर्ष पहलवान 138 दिन से बृजभूषण सिंह के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे। 18 जनवरी को पहली बार पहलवान धरने पर बैठे थे और 23 अप्रैल को दूसरी बार धरना शुरू किया। इसके बाद पहलवानों ने मौसम की मार झेली, पुलिस के साथ झड़प हुई। पहलवानों के खिलाफ एफआईआर भी हुई, लेकिन विरोध प्रदर्शन जारी रहा। हालांकि, पहलवानों और गृहमंत्री अमित शाह के बीच मुलाकात के बाद कहानी बदल गई और पहलवान काम पर लौट गए। उसके बाद खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ हुई बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा की गई और कुछ मामलों पर सहमति बनी। फिर पहलवानों ने 15 जून तक धरना-प्रदर्शन नहीं करने की बात मान ली। 
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पहलवानों का धरना प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
अभी एशियन गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप के ट्रायल्स के लिए हो रहा बवाल
भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाले पहलवानों को एशियाई खेलों के ट्रायल्स में छूट दिए जाने पर जमकर बवाल हो रहा है। पहले पूर्व ओलंपिक पदक विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त ने इसका विरोध किया था। इसके बाद कुछ और लोगों ने भी इसका विरोध किया। इस पर बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट, साक्षी मलिक समेत धरना दे रहे पहलवानों ने उन पर हमला बोला था। हालांकि, अब यह मामला बढ़ गया है। कुछ लोग पहलवानों पर धरने की आड़ में छूट लेने के आरोप लगा रहे हैं। इस पर अब विनेश ने चिट्ठी साझा कर पूरे मामले से पर्दा उठाया। उन्होंने लिखा कि ट्रायल्स में जो छूट धरना दे रहे पहलवानों को दी जा रही है, खेल मंत्रालय को लिखी गई चिट्ठी में इसकी मांग उन्होंने की ही नहीं थी।
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