आर्चरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रतिबंधित होने की मार तीरंदाजों को उठानी पड़ रही है। जिसके चलते पूर्व वर्ल्ड नंबर वन और एशियाई खेलों के गोल्ड मेडलिस्ट अभिषेक वर्मा को अपने खर्च पर वर्ल्ड इंडोर आर्चरी सीरीज में खेलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
कंपाउंड टीम इवेंट का इंचियोन में गोल्ड और जकार्ता एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाले अभिषेक ने प्रतिबंधित फेडरेशन और साई को वर्ल्ड इंडोर आर्चरी सीरीज में खेलने के लिए मदद मांगी है, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है।
वर्ल्ड आर्चरी की ओर से आयोजित की जाने वाली वर्ल्ड इंडोर आर्चरी सीरीज की छह चैंपियनशिप कराई जा रही हैं। इनमें से इस साल एक दिसंबर को मकाओ, 15 दिसंबर को रोम (इटली) और फरवरी में लास वेगास (अमेरिका) में होने वाली चैंपियनशिप में खेलने का प्रस्ताव अभिषेक ने दिया है। अगले वर्ष होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए देश के टॉप तीरंदाजों ने वर्ल्ड इंडोर सीरीज में खेलने का फैसला लिया है।
कुछ तीरंदाजों को ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट की ओर से भेजा जा रहा है, लेकिन अभिषेक के पास कोई प्रायोजक नहीं है। जिसके चलते उन्होंने फेडरेशन और साई से तीन से साढ़े तीन लाख रुपये की मदद की मांगी, लेकिन उन्हें जवाब दिया गया है कि यह चैंपियनशिप ट्रेनिंग के वार्षिक कैलेंडर (एसीटीसी) में नहीं शामिल है।
अभिषेक का कहना है कि उन्हें इस सीरीज में खेलने का फैसला इस वजह से लिया कि यहां खेलने से न सिर्फ उनके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी बल्कि उनकी ओवरऑल वर्ल्ड रैंकिंग में इजाफा होगा। इस वक्त वह वर्ल्ड नंबर तीन हैं।
अगर रैंकिंग ऊपर बढ़ती है तो अंतरराष्ट्रीय प्रायोजक आसानी से मिलते हैं। अभिषेक का कहना है कि पिछले कुछ सालों में स्वर्ण पदक उनके हाथ से आकर फिसल रहा है। यही कारण है कि वह इंडोर आर्चरी में टॉप तीरंदाजों के साथ खेलकर इस मानसिक दबाव से निकलना चाहते हैं।
यहां उनका गोल्ड आता है तो यह वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए बहुत अच्छा होगा। अगर उनका प्रस्ताव मंजूर नहीं हुआ तो उनके पास अपने पैसे से इस सीरीज में खेलने के अलावा कोई चारा नहीं है।