दीपा कर्माकर भले ही अगले महीने होने वाली विश्व कलात्मक जिम्नास्टिक चैंपियनशिप के लिए फिट नहीं हो पाई, लेकिन उनके कोच बिश्वेश्वर नंदी ने कहा कि भारत की इस स्टार जिम्नास्ट ने अभी टोक्यो ओलंपिक 2020 के लिए क्वालीफाई करने की उम्मीदें नहीं छोड़ी हैं। दीपा की टोक्यो ओलंपिक में खेलने की उम्मीदों को तब करारा झटका लगा, जब वह दाएं घुटने की चोट से उबरने में नाकाम रही, जिससे वह चार से 13 अक्टूबर के बीच जर्मनी के स्टटगार्ट में होने वाली विश्व चैंपियनशिप से बाहर हो गई जो कि ओलंपिक क्वालीफायर भी है।
दीपा के लंबे समय से कोच रहे नंदी ने माना कि ओलंपिक में जगह बना पाना अब बेहद मुश्किल होगा, क्योंकि इस खिलाड़ी को वापस अभ्यास में लौटने के लिए अभी कम से कम दो महीने लगेंगे। नंदी ने पीटीआई से कहा कि ‘दीपा विश्व चैंपियनशिप में नहीं खेल पाने से निराश है, लेकिन वह मानसिक तौर पर मजबूत है और मैं जानता हूं कि वह अंतरराष्ट्रीय जिम्नास्टिक में सफल वापसी करेगी।’
उन्होंने कहा कि वह अभी ‘रिहैबिलिटेशन’ से गुजर रही है। चिकित्सक और फिजियो से मंजूरी मिलने के बाद ही अभ्यास शुरू किया जाएगा। एक कोच होने के नाते मुझे जिम्नास्टिक से इतर उसकी जिंदगी के बारे में भी सोचना होगा। उम्मीद है कि नवंबर आखिर तक वह फिट हो जाएगी और इसके बाद दो महीने के अभ्यास के बाद उसे वापसी करनी चाहिए। ओलंपिक क्वालिफिकेशन के बारे में उन्होंने कहा कि विश्व चैंपियनशिप के तीन महीने बाद तीन विश्व कप होंगे लेकिन क्वालीफाई करना बेहद मुश्किल होगा।
उन्होंने कहा कि उसे क्वालीफाई करने के लिए तीनों विश्व कप में स्वर्ण या रजत पदक जीतना होगा, लेकिन वह इसे चुनौती के रूप में ले रही है। हमने अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है। अगर दुर्भाग्यवश वह टोक्यो में नहीं खेल पाती तो फिर 2024 का पेरिस ओलंपिक है। रियो ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहकर भारतीय जिम्नास्टिक को विश्व मानचित्र पर जगह दिलाने वाली दीपा घुटने की चोट के कारण लगभग दो साल से बाहर चल रही है।