दिल्ली हाई कोर्ट ने आजीवन श्रेणी में द्रोणाचार्य पुरस्कार की सूची से कुश्ती कोच जगरूप सिंह राठी का नाम हटाने पर केन्द्र सरकार को नोटिस भेजा है। राठी का नाम पहले इस सूची में शामिल था, लेकिन बाद में उनका नाम हटा दिया गया था। इसके बाद जगरूप सिंह राठी ने दिल्ली हाई कोर्ट में उनका नाम हटाने को लेकर याचिका दायर की थी। इस याचिका में सुनवाई के बाद केन्द्र सरकार और खेल मंत्रालय को नोटिस भेजा गया है।
आजीवन श्रेणी में दोणाचार्य पुरस्कार की सूची में जगरूप सिंह राठी को दोणाचार्य पुरस्कार मिलना था। उन्होंने कुश्ती कोच के रूप काफी अहम योगदान दिया है और अपनी बेटी को भी पहलवान बनाया। इसके बावजूद उन्हें साल 2021 में आजीवन श्रेणी में द्रोणाचार्य पुरस्कार नहीं मिला।
बेटी को भी बनाया पहलवान
फरीदाबाद के जगरूप सिंह राठी पहले पहलवान थे और डीएसपी भी रह चुके हैं। उन्होंने अपनी बेटी नेहा राठी को खुद कुश्ती के दांव-पेंच सिखाकर अंतर्राष्ट्रीय पहलवान बनाया है। जगरूप सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी हैं और अर्जुन अवार्ड भी हासिल कर चुके हैं। नेहा फिलहाल पुलिस में काम करती हैं और उन्हें भी अर्जुन अवार्ड और भीम अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। जगरूप सिंह राठी के पिता दरियाव सिंह और उनके दादा चौधरी सुलतान सिंह भी अपने समय के नामी पहलवान थे। दादा-पिता की विरासत को जगरूप सिंह ने संभाला था। जगरूप सिंह अपने बेटे को भी पहलवान बनाना चाहते थे, पर बेटे ने पहलवानी करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने नेहा को पहलवान बनाया।