उन्होंने कहा, 'एशियाई खेलों से पहले मुझे डेंगू हो गया था, जिससे मैं कमजोर हो गयी थी। लेकिन एशियाई खेलों के बाद मैंने 15 दिन का ब्रेक लिया और यहां आयी। मैं कांस्य पदक से खुश हूं। काश मैं इसे रजत या फिर स्वर्ण में बदल पाती।'
भारतीय तीरंदाजों ने इस तरह अपना अभियान दो कांस्य ओर एक रजत पदक से समाप्त किया। रजत पदक उन्होंने कम्पाउंड मिश्रित स्पर्धा में जीता जिसे प्रदर्शनी स्पर्धा के तौर पर इसमें शामिल किया गया है जिसमें केवल दो टीमें थी जिसमें एक मेजबान देश है। अपने दूसरे विश्व कप फाइनल में अभिषेक वर्मा ने शनिवार को पुरूष कम्पाउंड स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया।
भारत का गैर मान्यता प्राप्त तीरंदाजी संघ सत्र की इस अंतिम प्रतियोगिता में कोच रखने में असफल रहा। रिकर्व कोच धर्मेंद्र तिवारी अस्वस्थ हैं जबकि जीवनजोत सिंह (कम्पाउंड) ने द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिये अनदेखी किये जाने के बाद इस्तीफा दे दिया था।