उन्होंने कहा, 'मैंने चक्का फेंक सीखने का सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया जो मेरा मुख्य खेल नहीं है। 2020 (पैरालंपिक) की तैयारी के दौरान मैंने जकार्ता में एशियाई खेल 2018 में कांस्य पदक (चक्का फेंक में) जीता।'
दीपा ने कहा, 'लेकिन दुर्भाग्य से चक्का फेंक से मुझे 'सर्वाइकल क्षेत्र' में चोट लग रही थी। मेरी रीढ़ की हड्डी की चोट भी बड़ी थी। चक्के के लिए होने वाली मूवमेंट और झटका मेरे शरीर के अनुकूल नहीं थे। इसलिए मुझे पीछे हटना पड़ा।' यह पैरा एथलीट हालांकि समुद्री तैराकी से जुड़ने को लेकर उत्सुक है।
दीपा ने कहा, 'हालांकि मैं अपनी फिटनेस और ट्रेनिंग नहीं रोकना चाहती। मैं इस साल तैराकी करने की सोच रही हूं जिससे मैं पहले जुड़ी हुई थी। तैराकी पैरालंपिक के स्तर की नहीं लेकिन राष्ट्रीय स्तर की जिससे कि मैं ट्रेनिंग जारी रख सकूं।'
उन्होंने कहा, 'इस साल मैं समुद्री तैराकी में निजी रिकार्ड बनाना चाहती हूं लेकिन प्रतिस्पर्धी तौर पर नहीं और अपनी जिंदगी में एक और उपलब्धि हासिल करना चाहती हूं। सिर्फ इतनी सी बात है कि समुद्र पीछे छूट गया है और मैं समुद्र के पानी को छूना चाहती हूं।'