दरअसल बीते वर्ष एक भारतीय खिलाड़ी पर एक भारतवंशी की योजना बनाई गई थी। पीएम ने इच्छा जाहिर की थी कि ओलंपिक के दौरान भारतीय खिलाडिय़ों के समर्थन के लिए वहां रहने वाले भारतवंशी जुटें। भारतवंशी उन्हें देश का अहसास कराएं। इन भारतवंशियों को खिलाडिय़ों के समर्थन के लिए टिकट उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके बाद खेल मंत्रालय और आईओए ने मिलकर इस पर काम किया और जापान में भारतीय राजदूत को साथ जोड़ा। भारतीयों को जोडने की जिम्मेदारी भारतीय दूतावास को सौंपी गई, लेकिन कोरोना के बाद स्थितियां बदल गई हैं। भारतीय राजदूत ने पत्र में लिखा है कि इस साल जुलाई-अगस्त में होने वाले ओलंपिक में दर्शक किस तरह और कितने आएंगे इसका खुलासा अगले वर्ष मार्च में होगा, लेकिन यह तय है कि कई तरह पाबंदिया होंगी। जिसके चलते बतौर वालंटियर अधिक से अधिक भारतीयों को जोडना संभव नहीं होगा। राजदूत के पत्र के बाद मंत्रालय भी मान रहा है कि यह काम मुश्किल होगा।
राजदूत ने यह भी साफ किया है कि भारतीय दल को टोक्यो पहुंचने पर एयरपोर्ट पर कोविड टेस्ट कराना पड़ सकता है। ऐसा कोरोना के चलते जापान में भारतीय के प्रवेश की अनुमति नहीं होने के कारण है। ऐसे में भारतीय दल को एयरपोर्ट पर कोविड टेस्ट कराना होगा, जिसका अतिरिक्त खर्च की व्यवस्था करनी होगी। यही नहीं पब्लिक ट्रांसपोर्ट की भी अनुमति नहीं रहेगी। ऐसे में टैक्सी के अतिरिक्त खर्च का भी भार सहना पड़ सकता है। यही नहीं राजदूत ने यह भी सलाह दी है कि ओलंपिक की तैयारियों के लिए टीमों के जापान आने की व्यवस्थाएं अभी से कर ली जाएं।