कोरोना के चलते जब साजन प्रकाश की तैयारियां सिरे चढने का नाम नहीं ले रही थीं तब कोच प्रदीप कुमार ने उन्हें पिता की तरह सहारा दिया। बंगलूरू से दुबई में बस गए प्रदीप ने साजन को न सिर्फ अपने पास बुलाया बल्कि उन्हें अपने घर में रखा।
दुबई में साजन प्रदीप के संरक्षण में ओलंपिक का टिकट हासिल करने की तैयारियां करते रहे तो उनकी पत्नी घर पर बेटे की तरह उनका ख्याल रखती थीं। साजन को जिस तरह के भोजन की जरूरत होती थी प्रदीप की पत्नी वह उन्हें खिलाती थीं। तभी इटली में साजन ने ओलंपिक का ए क्वालिफिकेशन हासिल किया तो प्रदीप की आंखों में आंसू थे। मानों उनके बेटे ने यह कारनामा करके दिखाया हो।
दुबई में करेंगे टोक्यो की तैयारियां
यही कारण है कि साजन एक झटके में स्वीकार करते हैं कि उनकी सफलता में उनके कोच का बहुत बड़ा हाथ है। साजन के मुताबिक यह बीते वर्ष अगस्त की बात है जब वह कोच के पास दुबई चले गए थे।
तब से वह अब तक उन्हीं के पास हैं और आगे भी वह ओलंपिक की तैयारियां दुबई में करेंगे। उनकी कोशिश रहेगी कि वह दुबई से ही टोक्यो जाएं। दुबई में रहना काफी खर्चीला था। तभी प्रदीप सर ने उन्हें अपने पास रखा। उनकी पत्नी ने मां की तरह उन्हें खाना बनाकर खिलाया।
कोच को विश्वास था इस बार कमाल करेगा शिष्य
टोक्यो ओलंपिक अगर बीते वर्ष होते तो शायद साजन को खेलना का मौका नहीं मिल पाता। वह कंधे की चोट चलते चार माह तक परेशान रहे। साजन हालांकि मानते हैं कि हो सकता है ओलंपिक अगर अपने तय समय पर होते तो शायद वह पहले ही क्वालिफाई करने की कोशिश करते, लेकिन उनके लिए यह अच्छा रहा है कि ओलंपिक आगे बढ़ गए और उन्हें एक साल का अतिरिक्त समय मिल गया।
साजन मानते हैं कि ए क्वालिफाइंग मार्क (1.56.48 मिनट) जितना समय वह निकालने की क्षमता पहले भी रखते थे, लेकिन यह दिमागी बाधा बन गया था। कोच प्रदीप को विश्वास था कि इस बार वह इस बाधा को पार कर जाएंगे। अंत में वह उनके विश्वास पर खरे उतरे।
- 5वें स्थान पर 200 मीटर बटरफ्लाई में जकार्ता एशियाई खेलों में रहे साजन
- 8वां स्थान गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में हासिल किया और यहां भी वह इस इवेंट के फाइनल में पहुंचे
- 28वें स्थान पर रियो ओलंपिक में रहे, यहां वह यूनिवर्सिटी कोटा हासिल कर ओलंपिक खेलने गए