डब्ल्यूएफआई ने हालांकि स्पष्ट किया है कि चीन के पहलवानों को उस प्रोटोकाल से गुजरा होगा जिसे इस विषाणु के संक्रमण की पहचान करने के लिए तय किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘सभी पहलवानों को सभी ऐहतियाती कदमों से गुजरना होगा।’
शरण ने साथ ही कहा कि अगर चीन के पहलवान विषाणु से संक्रमित नहीं पाए जाते हैं तो कोई भी पहलवान उनके खिलाफ खेलने से इनकार नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, ‘‘समस्या चीन के एक-दो शहरों में है। पूरे देश में ऐसा नहीं है। अगर पहलवानों के चीन में सभी परीक्षण होते हैं और फिर हमारी सरकार के परीक्षणों में भी वे पाजीटिव नहीं पाए जाते तो फिर कोई खिलाड़ी नहीं कह सकता कि वह वहां से आए हैं और हमें उनके खिलाफ नहीं उतरेंगे।’
डब्ल्यूएफआई को कुश्ती की वैश्विक संस्था यूनाईटेड वर्ल्ड रेस्लिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) का भी पत्र मिला है जिसमें चेताया गया है कि किसी भी देश को प्रतिनिधित्व से महरूम नहीं किया जाना चाहिए। अगर भारत वीजा देने से इनकार करता है तो देश पर टूर्नामेंटों की मेजबानी से प्रतिबंध लगने का खतरा है। पिछले साल नई दिल्ली में प्रतियोगिता के लिए दो पाकिस्तानी निशानेबाजों को वीजा देने से इनकार किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने भविष्य में प्रतियोगिताओं की मेजबानी के लिए भारत के सभी आवेदनों को निलंबित कर दिया था।
उन्होंने कहा, ‘यूडब्ल्यूडब्ल्यू ने भी हमें लिखा है कि किसी भी देश के पहलवानों को वीजा मिलने में दिक्कत नहीं होनी चाहिये क्योंकि यह अनिवार्य टूर्नामेंट है। जब हमें टूर्नामेंट का आवंटन किया गया था तो हमें उन्हें आश्वासन देना था कि हम किसी देश को प्रतिनिधित्व से नहीं रोकेंगे।’