सेमीफाइनल में पक्षपात और धांधली का शिकार हुए बजरंग पूनिया कांस्य पदक के लिए हुए इस मैच के शुरुआती दौर में काफी पीछे थे। ओचिर ने उन्हें बाहर ढकेल दो अंक लिए और फिर चेस्ट थ्रो के जरिए चार अंक ले बजंरग पर 6-0 की बढ़त ले ली। बजरंग ने हालांकि दो अंक ले स्कोर 6-2 कर लिया, इसके बाद बजरंग ने लगातार अंक लेकर अपने अंकों की संख्या आठ कर ली। यहां मंगोलिया के खिलाड़ी ने एक अंक लिया, लेकिन इस हरियाणवी छोरे ने न सिर्फ जीत हासिल की बल्कि कांस्य पदक भी पक्क किया।
पिछली बार विश्व चैम्पियनशिप में रजत पदक जीतने वाले बजरंग ने इस चैम्पियनशिप के अपने पहले मुकाबले में पोलैंड के पहलवान क्रिज्सिटोफ बीनकोवस्की को 9-2 से करारी शिकस्त देकर प्री-क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया था। प्री-क्वार्टर फाइनल में उन्होंने स्लोवाकिया के डेविड हबाट को 3-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में कदम रखा था। क्वार्टर फाइनल में कोरिया के जोंग चोलसोन को 8-1 से मात देकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था और ओलंपिक कोटा हासिल किया। सेमीफाइनल में बजरंग का सामना कजाकिस्तान के दौलत नियाजबेकोव से हुआ, जिसमें वह कजाकिस्तान के पहलवान से पार नहीं पा सके। दोनों का स्कोर 9-9 रहा। कजाकिस्तान के पहलवान ने एक दांव चार अंक का लगाया, जिसके कारण बजरंग को हार मिली।
रवि कुमार दहिया ने पहले मुकाबले में कोरिया के किम सुंग ग्वोन को एकतरफा अंदाज में 11-0 से शिकस्त देकर प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी। प्री-क्वार्टर फाइनल में उनका मुकाबला अर्मेनिया के आर्सेन हारुतयुनयान से था, जिसे 18-6 से पटकते हुए अंतिम आठ में प्रवेश किया था।
रवि ने क्वार्टर फाइनल में पूर्व विश्व चैम्पियन और 2017 के एशियाई चैम्पियन जापान के यूकी ताकाहाशी को 6-1 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया, साथ ही भारत को टोक्यो ओलंपिक का कोटा भी दिलाया। रवि सेमीफाइनल में रूस के जवुर यूगेव से भिड़े, लेकिन उन्हें भी हार का सामना (4-6) करना पड़ा।