बजरंग की इस मांग पर खेल मंत्री रिजिजू ने कहा कि वह किसी भी खेल को कम या ज्यादा करके नहीं आंक सकते हैं। उन्होंने कहा कि खेल मंत्री होने के नाते मुझे सभी खेलों को समान महत्व देना होगा। मैं भेदभाव नहीं कर सकता। कुश्ती भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसने भारतीय तिरंगा ऊंचा रखा है लेकिन हमें सभी ओलंपिक खेलों के साथ साथ गैर ओलंपिक और पारंपरिक खेलों को भी महत्व देना होगा। रिजिजू ने कहा, लेकिन किसी खेल को राष्ट्रीय खेल घोषित करना यह बेहद भावनात्मक और आलोचनात्मक मामला है। इसलिए खेल मंत्री होने के नाते मुझे किसी मांग के आधार पर घोषणा या फैसला नहीं करना चाहिए। मैं इस मामले पर चर्चा करके बेवजह का विवाद पैदा नहीं करना चाहता हूं।
खेल मंत्री के साथ मुक्केबाज
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उन्होंने कहा कि टोक्यो में 2020 में होने वाले ओलंपिक महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं और अन्य खेलों की तरह कुश्ती टीम भी टोक्यो में हमारी मुख्य ताकत होगी। मैं कुश्ती के प्रबंधन, कोचों के प्रयास और पूरे तकनीकी सहयोगी स्टाफ से खुश हूं। भारत के पास टोक्यो में कई पदक जीतने की क्षमता है। डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष शरण भी इस अवसर पर उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि भारत ने रियो में दो पदक जीते थे और उनमें से एक कुश्ती में आया था। मैं वादा करता हूं कि टोक्यों में हमारे पहलवान इससे दोगुना पदक जीतेंगे।
25 वर्षीय बजरंग पूनिया ने कहा कि वर्ल्ड चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में मिली हार का गम कम करना मुश्किल है। कजाकस्थान के नूर सुल्तान में खेले गए वर्ल्ड चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में विवादित फैसले की वजह से पूनिया को हार का सामना करना पड़ा था। सेमीफाइनल में 9-9 अंकों की बराबरी के बावजूद कजाकस्थान के स्थानीय पहलवान को विजेता घोषित कर दिया गया था।
इसे लेकर बजरंग पूनिया ने कहा बुरा लगता है जब आप अपनी गलती की वजह से नहीं बल्कि किसी भेदभाव या बेईमानी की वजह से हार जाएं और गोल्ड जीतने से चूक जाएं। उन्होंने आगे कहा,' ये एक ऐसा दर्द है जो ओलंपिक में मेडल जीतने के बाद भी कम नहीं होगा क्योंकि मैंने वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए बहुत मेहनत की थी।