पिंडली की चोट के कारण एक साल तक परेशान रहे भारत के शीर्ष 3000 मीटर स्टीपलचेज़र अविनाश साबले अब पूरी तरह से फिट हैं और उनकी निगाहें सितंबर में होने वाली विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप सहित आगामी प्रतियोगिताओं में अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को बेहतर करने पर टिकी हैं। एशियाई खेलों के चैंपियन साबले इस सत्र में ऊटी में अभ्यास कर रहे हैं और भारतीय खेल प्राधिकरण के दक्षिणी केंद्र में अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म हासिल करने में जुटे हैं।
साबले ने कहा, 'पिछला साल अच्छा नहीं रहा, ऐसा भी नहीं लग रहा था कि मैं अच्छा प्रदर्शन कर पाऊंगा। लेकिन इस साल मैं डायमंड लीग में भाग ले रहा हूं, इसलिए (विश्व चैंपियनशिप के लिए) तैयारी अच्छी है। मेरा लक्ष्य अपना सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत समय हासिल करना है, जो आठ मिनट के करीब है। अभी अभ्यास के 15 दिन बचे हुए हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि मैं आठ मिनट के करीब पहुंचने में सफल रहूंगा।'
यह 30 वर्षीय खिलाड़ी 2023 में एशियाई खेलों के बाद से पिंडली की चोट से जूझ रहा था। उन्होंने 2025 के अपने सत्र की शुरुआत ज़ियामेन डायमंड लीग में आठ मिनट 22.59 सेकंड (8:22.59) सेकंड के समय के साथ की और इसके बाद शाओक्सिंग में 8:23.85 सेकंड का समय निकाला। साबले ने मई में दक्षिण कोरिया के गुमी में एशियाई चैंपियनशिप में 8:20.92 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता था।
उन्होंने कहा, 'तैयारियां अच्छी चल रही हैं। मैं सत्र की शुरुआत में चोटिल हो गया था। लेकिन इसके बावजूद मैंने चीन में दो डायमंड लीग स्पर्धाओं में हिस्सा लिया। मैंने अपना आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए एशियाई चैंपियनशिप में हिस्सा लिया।' यह भारतीय खिलाड़ी पिछली विश्व चैंपियनशिप में फाइनल तक पहुंचने में असफल रहा था और अपनी हीट में सातवें स्थान पर रहा था। लेकिन इस बार वह बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
साबले ने कहा, 'मैं विश्व चैंपियनशिप में इस बार अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहता हूं और उसके लिए अच्छी तैयारी कर रहा हूं।' साबले को 8:09.91 सेकंड का राष्ट्रीय रिकार्ड बनाए हुए लगभग एक वर्ष हो चुका है और अब उनकी निगाह आठ मिनट से कम समय निकालने पर टिकी हैं।उन्होंने कहा, 'निश्चित रूप से मैं यह उपलब्धि हासिल करना चाहता हूं। यह जल्दी नहीं होगा लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत प्रदर्शन करने में सफल रहूंगा।'
रोज छह किलोमीटर दौड़ कर जाते थे स्कूल
अविनाश का जन्म साल 1994 में एक किसान परिवार में हुए था। उनके गांव में स्कूल बस नहीं चलती थी। ऐसे में अविनाश को रोज छह किलोमीटर दौड़ कर स्कूल जाना पड़ता था। उस समय उन्हें नहीं पता था कि उनकी यह आदत उन्हें एशियाई खेलों में पदक दिलाएगी, लेकिन अपनी पढ़ाई के लिए वो रोज छह किलोमीटर दोड़ते थे। 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद अविनाश का चयन भारतीय सेना में हो गया। यहां से उनके लिए चीजें आसान हो गईं, लेकिन अब नई चुनौतियां उनके सामने थीं।
सिर्फ 18 साल की उम्र में अविनाश सेना का हिस्सा बने और उन्हें सियाचिन ग्लेशियर में तैनात कर दिया गया। 2013-14 तक सियाचिन में रहने के बाद रास्थान के रेगिस्तानी इलाकों में उन्हें भेज दिया गया। इसके बाद वो सिक्किम में तैनात रहे। 2017 में सेना के कोच ने उन्हें स्टीपलचेज में दोड़ने की सलाह दी और एक साल बाद ही उन्होंने राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया था। इसके बाद वो कई बार ऐसा कर चुके हैं। 2023 एशियाई खेलों में पुरुषों के तीन हजार मीटर स्टीपलचेज में पहला स्वर्ण जीतकर उन्होंने इतिहास रचा था।