विवादों के बीच गठित हुई भारतीय तीरंदाजी संघ (एएआई) की ओर से एशिया और वर्ल्ड कप की तैयारियों के लिए लगाए गए राष्ट्रीय कैंप में कोई भी तीरंदाज नहीं पहुंचा है। बीते वर्ष अगस्त में हुए एशियाई खेलों के बाद पहली बार कैंप लगाया गया है। खेल मंत्रालय और आईओए ने एएआई को मान्यता नहीं दी है। बावजूद इसके संघ की सिफारिश पर तीरंदाजों का कैंप पुणे और सोनीपत में मंजूर कर दिया गया। इसे शुरू हुए तीन हो चुके हैं, लेकिन कोई भी कोच और तीरंदाज इसमें शामिल नहीं हो सका है।
एएआई की ओर से कैंप के लिए रिकर्व और कंपाउंड में 16-16 पुरुष और महिला तीरंदाजों के नामों की सिफारिश की गई थी। साई ने आठ-आठ नामों को मंजूर किया। रिकर्व का कैंप एएसआई पुणे में और कंपाउंड का कैंप साई सेंटर पुणे में दस फरवरी से लगाया गया। कैंप में दीपिका कुमारी, अतानु दास, मंगल सिंह चांपिया, तरुणदीप रॉय, अभिषेक वर्मा, रजत चौहान, अतुल वर्मा, बोंबायला देवी, ज्योति सुरेखा जैसे तीरंदाजों का नाम शामिल है।
नेशनल के ट्रायल दें या कैंप पहुंचें
ज्यादातर तीरंदाजों को उनके राज्यों की ओर से कैंप में शामिल होने की मंजूरी नहीं दी गई है। राज्यों का कहना है कि अगले माह मार्च में लंबे समय बाद राष्ट्रीय चैंपियनशिप होनी है। इसके लिए राज्यों को टीम के गठन के लिए ट्रायल आयोजित करने हैं। इनमें कैंप में शामिल तीरंदाजों को खेलना है। जिसके चलते उन्हें कैंप में आना उचित नहीं समझा। वहीं अतानु दास और दीपिका कुमारी ने कुछ दिनों में कैंप में शामिल होने की बात कही है।
दूसरी ओर इस वक्त भोपाल में जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप चल रही है। कैंप में शामिल ज्यादातर कोच इस चैंपियनशिप में अपने राज्यों की ओर से शामिल हैं। वहीं साई का मानना है कि यह कैंप लगाने का सही वक्त नहीं था। इसे राष्ट्रीय चैंपियनशिप के बाद लगाया जाना चाहिए था। वहीं एएआई का कहना है कि कैंप में शामिल कुछ तीरंदाज जूनियर नेशनल में खेल रहे हैं, लेकिन जो वरिष्ठ तीरंदाज कैंप में नहीं पहुंचे हैं उन्हें तत्काल इसमें शामिल होने के लिए कहा जाएगा।