सुनील के लिए फाइनल में पहुंचना किसी रोमांच से कम नहीं रहा। सेमीफाइनल में सुनील एक समय कजाखस्तान के अजमत कुस्तुबायेव से 1-8 से पिछड़ रहे थे। यही वही अजमत थे जिनके खिलाफ चीन में हुई पिछली एशियाई चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में सुनील ने फतह हासिल कर फाइनल में जगह बनाई थी। मुकाबले में एक मिनट 13 सेकंड बचे थे। सुनील की हार तय मानी जा रही थी लेकिन 21 साल के पहलवान ने लगातार 11 अंक झटककर अजमत को एक बार फिर मात दे दी। इससे पहले सुनील ने शुरुआती राउंड में जापान के ताकाहिरो को हराया था।
यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि चार साल पहले अपने पिता को खोने वाले अर्जुन फाइनल में नहीं पहुंच सके। सेमीफाइनल में उनके सामने बाद में गोल्ड जीतने वाले ईरान के पोया मोहम्मद नासिरपुर थे। इस मजबूत ईरानी पहलवान पर अर्जुन ने 7-1 की बड़ी बढ़त ले रखी थी। स्टेडियम में मौजूद हर कुश्ती प्रेमी यही सोच रहा था कि अर्जुन चैंपियनशिप के पहले ही दिन बड़ा उलटफेर करने जा रहा है। मैट के नीचे एक कोने में बैठे कोच हरगोबिंद जानते थे कि अर्जुन का यह पहला टूर्नामेंट है।
उन्होंने चिल्लाकर कहा, अब रक्षण करो, वो चिल्लाते रहे लेकिन शोर में अर्जुन को सुनाई नहीं पड़ा। वह आक्रमण करते रहे और काउंटर में 4-4 अंक देकर 7-8 से मुकाबला हार गए। कांस्य की लड़ाई में कोच ने उन्हें समझाकर भेजा था। कांसे की लड़ाई में अर्जुन 1-4 से पिछड़ रहे थे। उन्होंने आक्रमण के जरिए छह अंक झटककर 7-4 से जीत हासिल की। स्वर्ण पदक ईरान के नासिरपुर ने कजाखस्तान के पहलवान को हराकर जीता।