विश्व कीर्तिमान बनाकर मीराबाई चानू जितनी खुशी महसूस कर रही हैं उससे कहीं ज्यादा राहत उन्हें पहली दो लिफ्ट फेल होने के बाद स्नैच की तीसरी लिफ्ट उठाने पर मिली थी। उस दौरान कोच, फेडरेशन के पदाधिकारी, साथी लिफ्टर सभी की सांसें थमी थीं। यह ठीक रियो ओलंपिक जैसी स्थिति थी। वहां मीरा क्लीन एंड जर्क में वॉश आउट हो गई थीं और एक मेडल देश के हाथ से निकल गया था। मीरा जानती थीं, इस बार ऐसा हुआ तो सब की अंगुलियां उनकी ओर खड़ी हो जाएंगी। उनके साथ कंधे से कंधा मिलकर खड़े रहे फेडरेशन, साई, मंत्रालय सब की गर्दन झुकेगी। यहीं मीरा ने अपने से कहा कि नहीं वह इस बार नहीं बिखरेंगी। उन्होंने प्रण लिया कि वह यह वजन हर हाल में उठएंगी और ऐसा ही किया।
मीरा अमर उजाला से खुलासा करती हैं। दो लिफ्ट फेल होने के बाद उन्हें नहीं समझ में आ रहा था कि ऐसा क्यों हो रहा है। प्रैक्टिस में 85 किलो वह आराम से उठा लेती हैं। वह दबाव में थीं, लेकिन उन्होंने तीसरी लिफ्ट के दौरान लंबी सांस ली, ध्यान लगाया और अपने आपसे कहा यह लिफ्ट उठानी ही उठानी है। मीरा को मालूम है कि यह नाजुक क्षण थे, लेकिन उन्हें खुशी है कि उन्होंने इस पर जीत पा ली। मीरा कहती हैं कि कंपटीशन से पहले उन्होंने दृढ़निश्चिय लिया था कि वह इस बार विश्व कीर्तिमान बनाएंगी। स्नैच में बिखरने के बाद उन्होंने अपने को एकाग्र कर क्लीन एंड जर्क में ऐसा किया। मीरा के मुताबिक उन्होंने प्रैक्टिस में 120-121 किलो उठाया है। क्लीन एंड जर्क की तीसरी लिफ्ट के दौरान उन्होंने यही सोचा कि वह प्रैक्टिस के लिए ही जा रही हैं।