एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता भारतीय जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने एक बार फिर प्रभावी प्रदर्शन किया लेकिन प्रतिष्ठित डायमंड लीग फाइनल में मामूली अंतर से कांस्य पदक से चूक गए। बीस वर्षीय नीरज ने जकार्ता एशियाई खेलों का गोल्ड जीतने के तीन दिन बाद ही डायमंड लीग सीरीज फाइनल में हिस्सा लिया। हरियाणा के पानीपत के किसान के बेटे चोपड़ा ने 85.73 मीटर का थ्रो फेंका और आठ खिलाड़ियों में चौथे स्थान पर रहे।
राष्ट्रमंडल खेलों के चैंपियन चोपड़ा पांचवें और आखिर से दूसरे दौर तक तीसरे स्थान पर थे लेकिन जर्मनी के थॉमस रोलर ने 85.76 मीटर का थ्रो फेंककर उन्हें 0.03 मीटर से पछाड़ दिया। चोपड़ा ने जकार्ता में 88.06 मीटर का थ्रो फेंका था। उन्हें चौथे स्थान पर रहने से 6000 डॉलर (करीब 4.25 लाख रुपये) और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ खेलने का अनुभव मिला। जर्मनी के आंद्रियास होफमैन ने 91.44 मीटर का थ्रो फेंककर स्वर्ण पदक जीता।
एस्तोनिया के मैग्नस कर्ट (87.57 मीटर) को रजत मिला। दूसरा फाइनल ब्रसल्स में खेला जाएगा। चोपड़ा अंकों के आधार पर छठे स्थान पर रहकर लीग फाइनल्स के लिए क्वालिफाई कर सके। वह दोहा में चौथे, यूजिनी में छठे और रबात में पांचवें स्थान पर रहे थे। बर्मिंघम चरण वह एशियाड के कारण नहीं खेल सके थे। अब वह आठ-नौ सितंबर तक चेक गणराज्य के ओस्त्रावा में होने वाले आईएएएफ कॉन्टिनेंटल कप में हिस्सा लेंगे।