ऐसा कम ही सुना गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाडिय़ों से सजे राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में पदक विजेताओं को चेक का प्रतिरूप थमाकर बिना पुरस्कार राशि के लौटा दिया गया हो। बीते माह चंडीगढ़ में खेले गए नेशनल रैंकिंग तीरंदाजी टूर्नामेंट में ऐसा किया गया है।
यह कोई छोटा-मोटा टूर्नामेंट नहीं था इसमें एशियाई और कॉमनवेल्थ खेलों के स्वर्ण पदक विजेता अभिषेक वर्मा, रजत चौहान, दीपिका कुमारी समेत एशियन गेम्स मेडलिस्ट तरुणदीप रॉय, ओलंपियन अतानु दास जैसे तीरंदाज खेले। विजेता के लिए 60 हजार रुपये और आठवें स्थान पर आने वाले के लिए 10 हजार रुपये की पुरस्कार राशि घोषित की गई थी, लेकिन किसी को भी राशि नहीं मिली है।
तीरंदाजी के इतिहास में यह पहला मौका है जब इतने बड़े टूर्नामेंट में विजेताओं को मौके पर पुरस्कार राशि का चेक नहीं दिया गया। हालांकि पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान राशि को दिखाता चेक का बड़ा प्रतिरूप जरूर दिया गया और कहा गया कि राशि उनके अकाउंट में भेज दी जाएगी। यह टूर्नामेंट 16 से 18 अप्रैल को हुआ था, लेकिन तीरंदाजों का दावा है कि उन्हें अब तक पुरस्कार राशि नहीं मिली है।
इस टूर्नामेंट में रीकर्व वर्ग में तरुणदीप रॉय, बोंबाइला देवी जबकि कंपाउंड में वर्ग में अभिषेक वर्मा और पूर्वाशा शेंडे ने स्वर्ण पदक जीते थे। इस टूर्नामेंट के बाद ही सुप्रीम कोर्ट की ओर से तीरंदाजी संघ को भंग कर नए सिरे से चुनाव कराने के आदेश दिए गए। सूत्र बताते हैं कि तीरंदाजों ने इस मुद्दे को तीरंदाजी संघ के कुछ पदाधिकारियों के समक्ष उठाया है। जिसमें तत्काल तीरंदाजों को पुरस्कार राशि जारी किए जाने की बात कही गई है। तीरंदाज भी इसको लेकर हैरान हैं। उनका कहना है कि यह पहली बार है जब नेशनल रैंकिंग टूर्नामेंट में इतने लंबे समय तक पुरस्कार राशि ही नहीं दी गई।
आयोजनकर्ता का दावा दी गई पुरस्कार राशि
इस टूर्नामेंट को आयोजित कराने वाले तीरंदाजी संघ के महासचिव महा सिंह का कहना है कि तीरंदाजों को पुरस्कार राशि आरटीजीएस के जरिए जारी की गई है। कुछ तीरंदाजों का आईएफएससी कोड गलत निकला है जिसके चलते राशि नहीं जा पाई है।