एशियाई खेलों और एशियाई चैंपियनशिप के स्वर्ण पदकधारी की यह ऐतिहासिक उपलब्धि है। भारत ने कभी भी विश्व चैंपियनशिप के एक चरण में एक से ज्यादा कांस्य पदक हासिल नहीं किए थे। इससे पहले विजेंदर सिंह (2009), विकास कृष्ण (2011), शिव थापा (2015) और गौरव बिधुड़ी (2017) ने विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किए थे।
भारतीय मुक्केबाजी में पंघाल के करिअर का ग्राफ शानदार रहा है जिसकी शुरुआत 2017 एशियाई चैंपियनशिप में 49 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक से हुई थी। रोहतक का यह मुक्केबाज इसी साल विश्व चैंपियनशिप में पदार्पण करते हुए क्वार्टर फाइनल तक पहुंचा था। फिर उन्होंने बुल्गारिया में प्रतिष्ठित स्ट्रांदजा मेमोरियल में लगातार स्वर्ण पदक हासिल किए और फिर वह 2018 में एशियाई चैंपियन बना। इस साल उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप का स्वर्ण अपने नाम कर किया और फिर 49 किग्रा के ओलंपिक कार्यक्रम से हटने के बाद 52 किग्रा में खेलने का फैसला किया।